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हाजी याकूब कुरैशी की 51 करोड़ रु. के इनाम की घोषणा जो की ख़बरों के मुताबिक 2006 में ही की जा चुकी थी और पेरिस में कार्टूनिस्ट और पत्रकारों पर हमले के बाद अब फिर से दोहराई गई ! और ये कहा गया की ‘पैगंबर की शान से छेड़छाड़ करने वाला सिर्फ मौत का हकदार है और ऐसे लोगों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही शुरू करने की कोई जरूरत नहीं है। रसूल के आशिक (पैगंबर को मानने वाले) ही उन्हें सजा देंगे।’ और साथ में ये भी सफाई दी के यह उनके धर्म से जुड़ा मामला है और इसका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है।

क्या कुरैशी ये भूल रहे हैं की वो भारत में हैं और यहाँ राजनीति का धर्म से हमेशा लेना देना रहा है और उनकी ये घोषणा यहाँ की राजनीति के साथ पहले से ही विभाजन से लेकर आज पकिस्तान के साथ दुनिया भर के आतंकवादियों की वजह से शर्मिंदगी झेलने को मजबूर उनके अपने ही मजहब के लोगों के प्रति अब वह नजरिया पैदा करेगी जो हो सकता है इस देश के निर्माण की नीव को ही हिला दे

क्यूँ की यह सत्य एक आम निर्दोष मुस्लिम भी नहीं ठुकरा सकता की इस्लाम आज आतंकवादियों की वजह से कठघरे में हैं !

लेकिन ऐसा भी नहीं है की इस दुश्चक्र में खुद मुसलमान नहीं मर रहा ! वो भी इसकी चपेट में आया ही है इसीलिए इसके लिए एक आम मुसलमान को कोई ताना जरुर सुनने को मिलता होगा लेकिन यहाँ कोई भी आतंकवादियों के किये का बदला केवल दोनों का धर्म एक है इसीलिए एक आम मुसलमान से नहीं चुकाता ! कुछेक कट्टर बेअसर राजनैतिक बयानबाजियों होती है जिनका आधार भी आप ही की तरह के दोनों और के लोगों के ही बयान होते हैं लेकिन आज भी इस देश का एक अमनपसंद इंसान किसी भी धर्म का हो वो ऐसे आतंकवाद जैसी कायरता के खिलाफ ही होगा इसके प्रति सारी दुनिया आश्वस्त रही है ! और दुनियाभर के लोकतान्त्रिक और शांतिप्रिय देश इसके लिए भारत की और से आश्वस्त इसलिए हैं की यहाँ इन आतंकवादियों के अपने आतंकवाद के पीछे के कारणों से कोई इत्तेफाक रखता भी हो तो भी बेगुनाह और निहत्थो की ह्त्या का कोई समर्थन नहीं करता ! और जहाँ तक मैं समझाता हूँ की हाजी याकूब कुरैशी इस्लाम भी कायरता का समर्थन नहीं करता जिसे आप सजा का नाम देकर आप पुरस्कार देने निकले थे ! क्या सजा उसे कहते हैं जो इस तरह की कायरता के प्रदर्शन के साथ दी जाती है ? क्या सजा सुनाने वाला और देने वाला क्या इस तरह भगोड़ा और कायर होता है ?

लेकिन अब कुरैशी हजरात आपके सीधे आतंकवादियों के लिए इनाम की घोषणा अब इस देश के अमनपसंदों की इस धारणा को कायम नहीं रख सकती ! क्यूँ की आप जिन आतंकवादियों को पुरस्कृत करना चाहते हो उनके आतंकवाद के पीछे के कारणों में एक से तो आप इत्तेफाक रखते ही हो लेकिन साथ साथ उनके द्वारा बेगुनाहों और निहत्थों की ह्त्या को भी पुरस्कार-पात्र होने का गलत सन्देश फैला रहे हो और वह भी इस्लाम के नाम पर तो जाहिर है अब तक कम से कम इस देश में इस्लाम को दोषी ठहराने से कतराने वालों के पास अब ऐसा न करने के लिए कोई वजह नहीं बचेगी ! और हाँ ये जरुर इस देश की मूल धारणा के साथ साथ इस देश में इस्लाम के लिए खतरा होगी !

लेकिन इस देश और अपने इस्लाम के लिए आखिर इतना बड़ा इल्जाम उठाने की आपकी व्यक्तिगत ही सही क्या जरुरत रही ? वह जो हुवा इस देश में तो नहीं हुवा ! और न ही उन हत्यारों के अलावा इकलौते आप ही इस दुनिया में रसूल के आशिक बचें रह गए थे ?? उनकी कद्रदानी के लिए ?? और जिन्हें रसूल का आशिक मान उनके द्वारा इनाम का दावा करने का इन्तजार कर रहे थे उनका कुत्ते की मौत मारा जाना ही ये साबीत करता है की वो अपने आप को और आप उनको भले ही रसूल का आशिक मान रहे थे लेकिन रसूल उन्हें अपना आशिक नहीं मान रहा था वरना हर हाल में उन्हें बचाता जैसे आपको बचाए रखा है आपके द्वारा उन नकली और जाहिलता के आशिकों को रसूल का आशिक समझने के गुनाह के बावजूद आपको बचाए रक्खा है ! इसीलिए अब हमें तो कम से कम इस बात का यकीं हो चला है की आपका खुदा वास्तव में रहमदिल है जिसने भटके हुवों को तो नहीं बक्शा लेकिन भटकने की कगार पर रहने वाले आप जैसों को बक्श दिया !!
वास्तव में याकूब कुरैशी ! खुदा आपका हाफिज है ! लेकिन

फिलहाल आप जिस देश में पैदा होकर रह रहे हैं आपकी यह करनी उसके संविधान के खिलाफ जाने का साफ़ साफ़ संकेत दे रही है क्यूँ की अगर ऐसी कोई घटना भारत में भी होती तो भी आपको किसी की मौत पर इनाम के ऐलान की इजाजत नहीं है !

मत भूलिए की यंहा हर गुनाह सिर्फ संविधान के बनाए कानून से या तो सजा पाता है या फिर दया ,लेकिन किसी भी सूरत में संविधान का कोई भी गुनाहगार किसी भी इनाम का हकदार नहीं होता लेकिन अब आपने जो शुरू किया उससे हमें आश्चर्य और डर भी है की आपकी घोषणा पर किसी भी धर्मगुरुओं की अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई इसका क्या मतलब हो सकता है ?

क्या वे भी अपने अपने धर्म के ऐसे किसी न किसी अपमान के बदले हत्या पर इनाम घोषित करने की तो नहीं सोच रहे !
अब तक तो शायद ऐसा नहीं लगता क्यूँ की आप अभी तक महफूज हो और इस देश में भी संविधान है शरियत नहीं !

वास्तव में याकूब कुरैशी ! खुदा आपका हाफिज है ! इसीलिए ….
हम सिर्फ और सिर्फ भारत के संविधान में यकीं रखने वाले भी आपको कह रहे हैं
खुदा हाफिज !