हिन्दू और मुसलमान दोनों धरती पर बोझ हैं ?

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HINDU-MUSLIM

अफ़ज़ल ख़ान

हिन्दू और मुसलमान दोनो धरती के बोझ है? – प्रशन इस लिये उठता है के जब मे ने 250 वर्ष के इतिहास कंगाला को पता चला के जो आधुनिक विश्व मतलब 1800 के बाद जो दुनिया मे तरक़्क़ी हुई या विकास हुआ उस मे पश्चिम मुल्को का हाथ है. इस विकास के पीछे सिर्फ यहूदी और ईसाई लोगो का ही हाथ है. हिन्दू और मुस्लिम का इस विकास मे 1 % का भी सहयोग नही है. मनुष्य का इतिहास देखे तो पता चले गा के उसी क़ौम ने तरक्की की जिस मे 3 खूबीया थी. शिक्षा, अर्थ व वित्तीय और शक्ति रूप से मजबूत थे.और इस तीनो क्षेत्र मे हिन्दी व मुसलमान बहुत पीछे थे

अट्ठारहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध तथा उन्नीसवीं शताब्दी के पूर्वार्ध में कुछ पश्चिमी देशों के तकनीकी, सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक स्थिति में काफी बडा बदलाव आया। इसे ही औद्योगिक क्रान्ति (Industrial Revolution) के नाम से जाना जाता है.इंग्लैंड में उन दिनों कुछ नए यांत्रिक आविष्कार हुए। जेम्स के फ़्लाइंग शटल (1733), हारग्रीव्ज़ की स्पिनिंग जेनी (1770), आर्कराइट के वाटर पावर स्पिनिंग फ़्रेम (1769), क्रांपटन के म्यूल (1779) और कार्टराइट के पावर लूम (1785) से वस्त्रोत्पादन में पर्याप्त गति आई। जेम्स वाट के भाप के इंजन (1789) का उपयोग गहरी खानों से पानी को बाहर फेंकने के लिए किया गया। जल और वाष्प शक्ति का धीरे-धीरे उपयोग बढ़ा और एक नए युग का सूत्रपात हुआ। भाप के इंजन में सर्दी, गर्मी, वर्षा सहने की शक्ति थी, उससे कहीं भी 24 घंटे काम लिया जा सकता था। इस नई शक्ति का उपयोग यातायात के साधनों में करने से भौगोलिक दूरियाँ कम होने लगीं।.

अब आप देखिये के 1800 से ले कर 1940 तक हम हिन्दी और मुसलमान सिर्फ बादशाहत या गद्दी के लिये लड़ते रहे.जिस समय पूरा युरोप तरक़्क़ी कर रहा था हम उस समय तक आधुनिक शिक्षा तो दूर हम सामान्या शिक्षा भी नही जानते थे.

अब आप को मे ऐसे 20 विज्ञानिको का नाम बताने जा रहा हूँ जो के 1800-1920 के दरमयान हुए और उन के आविष्‍कार ने दुनिया को आधुनिक दौर मे ले गये. इन विज्ञानिको मे सभी या तो यहूदी या ईसाई है ,एक भी इस मे हिन्दू और मुस्लिम विज्ञानिक नही है. अलेक्ज़ांडर ग्राहम बेलl), अल्फ्रेड नोबेल , आर्मेडियो अवोगाद्रो, एंटोइन लावोइसीयर , अगस्तिन फ्रेसनेल , क्रिश्चियन डॉप्लर, एडमंड हैली , एडविन हबल , एमिल बेर्लिनेर , एन्रीको फर्मी , फ्रेड हॉयल , फ्रिट्ज हैबर , गैलीलियो गैलिली , गिओवानी केसीनी, गुगलीएल्मो मार्कोनी , सर आइज़क न्यूटन , जेम्स क्लार्क मैक्सवेल, जान इंगेनहाउज .अब एक नज़र इधर भी डालिये के दुनिया के सब से बड़ा इनाम नोबेल प्राइज़ भिन्न भिन्न क्षेत्रो मे विज्ञानिको को दिया जाता है उस मे हमारी क्या स्थिति है. 1901-2011 तक नोबल प्राइज़ भौतिक,रसायन,मेडिकल क्षेत्र 375 वेज्ञानिक को दिया गया है जिस मे सिर्फ 4 हिन्दू और 1 मुस्लिम विज्ञानिक को मिला है बाकी विज्ञानिक या तो यहूदी या ईसाई है. इस से पता चलता है के शिक्षा के क्षेत्र मे हम बहुत पीछे है.

अब देखिये पूरी दुनिया मे 61 इस्लामी मुल्क है जिन की जनसंख्या 1.50 अरब के करीब है, और हुल 435 यूनिवर्सिटी है,दूसरी तरफ हिन्दू की जनसंख्या 1.26 अरब के क़रीब है और 385 यूनिवर्सिटी है, जब के अगर हम देखे तो अमेरिका मे 3 हज़ार से अधिक , जापान मे 900 से अधिक यूनिवर्सिटी है. ईसाई दुनिया के 45 % नौजवान यूनिवर्सिटी तक पहुंचते है वही मुसलमान के नौजवान 2% और हिन्दू के नवजवान 8 % तक यूनिवर्सिटी तक पहुंचते है. दुनिया के 200 बड़ी यूनिवर्सिटी मे से 54 अमेरिका,24 इंग्लेंड,17 ऑस्ट्रेलिया,10 चीन,10 जापान, 10 हॉलॅंड,9 फ़्राँस.8 जर्मनी, 2 भारत और 1 इस्लामी मुलकक मे है.

अब हम आर्थिक रूप से देखते है. अमेरिका का जी. डी. पी 14.9 ट्रिलियन डॉलर है जब के वही पूरे इस्लामिक मुल्क का कुल जी. डी. पी 3.5 ट्रिलियन डॉलर है. वही भारत का 1.873 ट्रिलियन डॉलर है.अमेरिका का वॉल स्ट्रीट 20 ट्रिलियन डॉलर का मलिक है, सिर्फ कोका कोला कंपनी के इमेज की वैल्यू 97 अरब डॉलर है. दुनिया मे इस समय 38000 मल्टिनॅशनल कंपनी है इन मे से 32000 कंपनी सिर्फ अमेरिका और युरोप मे है. दुनिया के 52 % फैक्ट्री ने ईसाई मुल्क मे है जब के 70 % कंपनी के मालिक ईसाई या यहूदी है. अभी तक दुनिया के 10000 बड़ी अविष्कारो मे 6103 अविष्कार अकेला अमेरिका मे और 8410 अविष्कार ईसाई या यहूदीने की है.. दुनिया के 50 अमीरो मे 20 अमेरिका,5 इंग्लेंड,3 चीन, 2 मक्सिको, 2 भारत और 1 अरब मुल्क का है. अब आप खुद अंदाजा लगाइये के हिन्दू और मुसलमान का इस धरती पे क्या औकात है.

अब हम आप को बताते है के हम हिन्दू और मुसलमान जनहित,परोपकार या समाज सेवा मे भी ईसाई और यहूदी से पीछे है. रेडक्रॉस जो दुनिया का सब से बड़ा मानवीय संगठन है. इस के बारे मे बताने की जरूरत नही है. आप को मालूम हो गा के बिल- मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन मे बिल गेट्स ने 10 बिलियन डॉलर से इस फाउंडेशन की बुनियाद रखी है. जो के पूरे विशव के 8 करोड़ बच्चो के सेहत का ख्याल रखाता है, इस के अतिरिक्त एड्स और आफ्रिका मुल्क के गरीब देशो को खाना और मानवीय सहायता पहुचता है. दुनिया इस समय दांग रह गयी जब वॉरेन बफे ने इस फाउंडेशन को 18 बिलियन डॉलर दान मे दे दी मतलब वॉरेन ने 80 % अपनी पूँजी दान मे दे दी. दुनिया के 50 सब से . दान देने वाले मे एक भी हिन्दू या मुसलमान नही है. जब के हम जानते है के भारत मे अरब पति है. मुकेश अंबानी अपना घर बनाने मे 4000 करोड़ खर्च कर सकते है, और अरब का अमीर शहज़ादा अपना स्पेशल जहाज पर 500 मिलियन डॉलर खर्च कर सकता है मगर मानवीय सहायता के लिये आगे नही आ सकता है.अभी विप्रो के मलिक अज़ीम हशीम प्रेम जी ने 2 बिलियन डॉलर मानवीय सहायता दी, ए भारत का सब से बड़ा डोनेशन है.

अभी और भी बहुत से क्षेत्र है जहा हिन्दू और मुस्लिम ईसाई और यहूदी क़ौम से बहुत पीछे है. अब आप खुद बताये के क्या हिन्दू और मुस्लिम इस धरती पे बोझ नही है.?

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38 thoughts on “हिन्दू और मुसलमान दोनों धरती पर बोझ हैं ?

  1. नास्तिक

    पार्ट – १ हिंदू और मुस्लमान आज भी भूत काल में जी रहे है . दोनों ही आत्म मुग्धता में जी रहे हैं . हिंदू कहते है कि भारत विश्व गुरु था . १५-२० साल पहले यह तथाकथित हिन्दुवादी ( आर. एस. एस. ) कहते थे कि २०१२ में भारत विश्व गुरु बन जायेगा . अब जब २०१२ निकल गया तो मैंने एक पोंगे पंथी मित्र से इस बारे में पूछा तो बोला नहीं वो पता नहीं किसने कहा लेकिन अब “गायत्री परिवार” ने बताया है कि २०१४ में भारत में बहुत बड़ा सकारात्मक परिवर्तन होगा उसका कहने का मतलब था कि अब मोदी आ रहा और भारत विश्व कि नंबर १ शक्ति बनेगा. जय हो मूर्खो कि ……. भारत एक ढंग कि पिस्तौल तक नहीं बना सका जो आर्मी को दे सके . आज भी हम अच्छी पिस्टल के लिए स्विट्ज़रलैंड, इंग्लैंड , अमेरिका, युगोस्लाविया पर निर्भर है . अब लोग कहेंगे कि हमने एटम बम्ब बनाया , मिसाइल बनायीं , लेकिन मुझे यह सत्य नहीं लगता क्योंकि जब तक भारत के बाज़ार के दरवाजे विदेशी कंपनियों के लिए नहीं खुले थे तब तक हम बजाज के स्कूटर चलाते थे , उन्हें जब तक झुकाया नहीं जाता था, दस बीस किक् नहीं लगायी जातीं थी स्कूटर स्टार्ट नहीं होता था . जावा या यज़दी कि मोटर साईकिल स्टार्ट होने में दस से पन्द्रह मिनट ले लेती थी , चलाने वाला पसीने पसीने हो जाता था . यह भारतीय कम्पनियाँ वो ही पुरानी विदेशों से गयी तकनिकी ही देते रहे और हरामखोरो ने तकनिकी अनुशंधान पर कुछ नहीं किया . अब हाफ किक् स्टार्ट बाइक लीजिए . सत्य यह है कि भारत , पकिस्तान , उत्तर कोरिया आदि ने चोर रास्ते (चुरा के या खरीद के) से परमाण्विक शक्ति हासिल कि है , यह ही काम अब इरान कर रहा है . बात कडुवी है लेकिन सत्य है , बेसिक चीजों कि तकनिकी विकसित कर नहीं पाये और दावा परमाणु बम्ब और मिसाइल बनाने का ??????????

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    1. yogen

      ह ,मै आप कि बत से सेह्मत हुन ,लकिन एक बत ध्यन रख्नि चहिये अमेर ,ब्रितैन ,के पस जो सन्सोधन किय वो हिन्दुस्तन ए अने के बद हुवे है,क्योकि उन्होने वैदो पध और उस्मे से सन्सोधन किय ,और दुस्रि बात कि ये सर पैस उन्होने ह्न्दुस्तन को लुतकेर जो पैस बनय उस पैसे से हि किय ,आप को मलुम न हो तो बत दु कि उस समय मे तिपु सुलतन ने भि तोपो क उसे ब्तितेन के सथ किय तह ,ोनोमल्य इन्दिअ बहुत स्त्रोन्ग थ .लकिन पौत शन्ति प्रिय थ ,स्वम्वेर प्रथ से मलुम होयत है ,लद्कियो पेर बन्दिश नहि थि ,लकिन जब मुगेल अये तो दैश यनि भरत कि सन्स्क्रुति हि बदल गये ,उन्के अत्यचर से लद्कियो को पर्द प्रथ हिन्द मे चलु हुये बद मे अन्ग्रेजो ने लुत भै कह्न असान है ,सम्ज्हे

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      1. anita yadav

        u r true but apne kabhi jaanne ki koshish ki jis hindu dharm may 33 koti devi devta hai wo aj itna peeche kyo? ap bhi unhi hindu k vanshaj hai yani genetically hindu toh phir reason search kariye aisa kyo? and i know the reason ,i will publish in future

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        1. सिकंदर हयात

          अनीता यादव जी और प्रमोद भाई ये शायद आप लोगो के इस साइट पर पहले कमेंट हे आप लोगो का यहाँ बहुत स्वागत हे

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    2. Amrit

      es article ko likhne wala sabse bda chutiya hai. Maybe Kisi Christian Ki najayaz aulaad. Sale chutiye yha aa k gyan pel rha hai pehle tu ye bta Ki aajtak tune kya kiya hai apni jindagi me. Bhosadi k pehle tu khud ke bare me soch phir Hindu Muslim k bare me sochna. Tere kese gaandu hai India me tabhi aajtak India ek pistal nhi bna paya wrna hmare hi granth padh k Christians ne bahut kuchh Kr liya. Ja k dekh abhi bahut si countries me Sanskrit Sikh rhe h tere Christian baap.

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      1. tanwar

        ye likhar aapne apni ouakat khud hi dikha di ki India m chutiya logo ki kami ni h

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    3. AASHISH

      mai janta hoon ki ye sab jo tumne likha hai apne blog ki popularity ke liye likha hai kyunki pyaar se jyada simple tarike nafrat bik jaati hai aur mai ye bhi nahi samajh chuka hoon ki tumne hindus aur muslims ko nicha dikhane ke liye sirf aadhunik kaal(1800 ke baad ka)hi kyun chuna kyunki tum jaante ho agar prachin bharat ki agar tumne baat ki to tum tark bhi nahi de payonge .tumne sirf negetive likha tumne ye nahi bataya 18vi century me india dunia ka sabse amir desh tha 19v shatabdi tak heere ka ekmatra soarce tha jabki angrejo ne aakar sab kuch loot liya .mai to ye bhi kehna chahoonga ki isai ek chij me jaroor aage ho sakta hai wo hai logo ko gulam banana ye uski chaturai nahi balki uski gulaam mansikta ko darshat hai.jphoot dalo shasan karo ye uski sabhyta me shamil tha jabki ham atithi devo bhav per vishwae karne waale log hain.tum ye bhi achhe se jaante ho ki us dauran bharat baratiye logoko khane ke liye bhi badi mushkil se milta tha to invention kya khaak karenge but iske bavjood tumhe mai aage sabhi sawalo ke jawab doonga kyounki tumne mere dharm per sawal hi nahi balki mere desh ki sanskriti per sawal uthaya hai….rahi baat aadhunik kaal ki phikar mat karo bharat aane wale kal me duniya ki sabse badi shakti hoga kyunki bharat duniya ki sabse teji se badhti hui economy hai aur duniya ki fifth sabse badi economy hai.jo hindu aur musalman dono ke liye avsar paida karega jai hind

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  2. नास्तिक

    पार्ट – २ और मूर्खता कि पराकाष्ठता तो देखो कि पोंगे कहते है कि जो चीजें आज पश्चिम ने बनायीं हैं , वो तो हमारे यहाँ हजारों लाखों वर्षों पूर्व थी जैसे पुष्पक विमान और वेदों में तो सारे विश्व का ज्ञान छिपा है . हे मूर्खाधिराजों अगर तुम्हारे वेदों में इतना ही ज्ञान है तो पश्चिम देशों के आगे तकनिकी कि भीख का कटोरा क्यों फैलाते हो. क्यों नहीं यह वेदों से पढ़ कर विकसित कर लेते . एक इन मूर्खों के राज ज्योतिष होते थे जो राहू काल कि गणना और शुभ अशुभ बांचते थे तथा राजा महाराजाओं को गंडे ताबीज , नग, नगीने धारण करने कि सलाह देते थे , यह मूर्ख इन्हीं सब शुभ अशुभ के फेर में बैठे रहते थे और विदेशी इन्हें कूट पीट और लूट के चले जाते थे . लेकिन यह धर्म भीरु “राजे महाराजे” उन राज ज्योतिषियों को कुछ नहीं कहते थे. मैं उस काल में यदि कोई राजा होता तो इन ज्योतिषीयों को सरे आम फांसी पे लटकवा देता . अब बात करते है मुसलामानों कि, विश्व में दूसरे नंबर कि आबादी वाला धर्म तेल सम्पदा से भरपूर लेकिन विज्ञान और तर्क से एकदम खाली . तर्क किया तो ईश निंदा में इस्लामिक मुल्क में सजाए मौत और लोक्तान्त्रतिक देशों में मौत का फतवा और हो सकता है कि कोई धर्मांध आपकी हत्या जन्नत और ७० हूरों के लिए कर दे. . जो कठमुल्लों ने बताया है वो आदि और अंतिम सत्य वैज्ञानिक तर्क का कोई मूल्य नहीं . खोज बिना तर्क के नहीं होती. पश्चिम वासियों ने अपने को चर्च के शिकंजे से मुक्त कर लिया है इसलिए वहां सारी विचारधाराओं को सम्मान मिलाता है . अब लोग कहेंगे कि पश्चिमी लोग बेशर्म है , बदन उघाड़ के रखते है तो मैं इन मूर्खों को बताना चाहता हूँ कि भारत में सेक्स पे पहला ग्रन्थ (कामसूत्र) लिखा गया और छठी सदी में खजुराहो के मंदिरों में पशु गमन , पुरुष गमन ( समलैंगिक ) का मूर्तियों द्वारा चितांकन हुआ . आज भी राजस्थान और मध्य प्रदेश में स्त्रियां सार्वजनिक नहरों और तालाबों में सार्वजानिक रूप से स्नान कराती है . अपने को सुप्रीम और दूसरों को तुच्छ समझना हिंदू और मुसलमानों खास अदा है.

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    1. जितेंद्र सिंह तवर

      मैंआप की बात से सहमत नहीं हूं क्योंकि किसी समय Bharatविश्वगुरु था भारत कोजग सिरमौर और सोने की चिड़िया कहा जाता था इतिहास गवाह hey ki Arbi Farsi Kabhi पानी के लिए तरसते थे आज वह तेल में नहा रहे हैं परिवर्तन संसार का नियम है भारतकहां वह स्वर्णिम काल नहीं रहातो यह समय भी गुजर ही जाएगा आप बात करते हैं की ईसाइयों और यहूदियों नए तरीख तरक्की की हैआप यह बताएं कि इस तरह की से विश्व को क्या मिला इनकी इशिता की से हमेंPradushan Parmanu Bamवनों की कटाई और do vishwayudh मिले हैंइंसान का इंसान के प्रति अत्याचार any ki dain haiऔर आज इन्हीं की वजह से विश्व Pathan ki aur agrasar haimere paas कहने को बहुत कुछ है पर इतना ही कहूंगा किachhawa कि यह सब तरक्की हमने नहीं की परंतु दुख इस बात का है कि हम इस आधुनिक कलचर Ke Gulam ho gaye hai Hame ya pure wiswas ko
      Aaj Ye sochne ki jarurat hai कि हम इस प्रकृति की रक्षा कैसे करेंglobal पॉल्यूशन की वजह से ग्लो बल वार्मिंग हो रही हेइससे कैसे निपटें तरक्की का सही अर्थ है जन समाज और प्रकृति का कल्याण

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  3. नास्तिक

    पार्ट – ३ मैंने जब अरब मुल्को का अध्ययन ( वास्तव में अरब प्रायद्वीप के मुल्क जैसे सउदी अरब , अरब अमीरत को छोड बाकि मुल्क अरब नहीं है , न जातीय रूप से न ही भाषीय रूप से , इस्लाम के प्रसार से पूरबी एशिया, मध्य एशिया , पश्चिम एशिया , अफ्रीका (मिश्र आदि ) कि भाषाओँ और संस्कृति को नष्ट किया गया और अरब भाषा और संस्कृति थोपी गयी यह कह कर कि क़यामत के बाद जब मुर्दे जिंदा होंगे तो अरबी में सवाल जबाब होंगे और लोग खुद बा खुद अरबी में बात करने लगेगे और अरबी बहुत पवित्र भाषा है जैसे हिंदू कहते है कि संस्कृत देव वाणी है , देवता संस्कृत में बात करते है . इसलिए मैं नास्तिक हूँ , मैं उस ईश्वर को नहीं मानता जो किसी विशेष भाषा को ही समझाता है . मुल्ला अरबी में न बात कर सकता न समझ सकता लेकिन फिर भी अरबी कि आयात पढता है और जो अर्थ उसे समझा दिया गया है वो ही समझता है और दूसरों को समझाता है, ऐसा ही पंडितों और संस्कृत के साथ है. आज से बीस वर्ष पहले जब मैं अपने मित्रों से कहता था कि भाई कुरान का हिंदी में अनुवाद क्यों नहीं उपलब्ध है तो कहते थे कि अरबी के शब्दों का सही पर्याय हिंदी व् अंग्रेजी में नहीं है , मै कहता था फिर तुम कैसे समझते हो तुम्हें भी तो इमाम साहब हिंदी (उर्दू) में समझाते है तो वो आधारहीन कुतर्क करते थे . ताज्जुब कि बात यह है कि अधिकांश मुसलमानों को उर्दू , फारसी , अरबी का अंतर नहीं पता है . मैंने एक मुस्लिम मित्र से कहा कि “सउदी अरब” में “पेप्सी” (कोल्ड ड्रिंक ) को “बेब्सी” और “पकिस्तान” को “बाकिस्तान” या “फकिस्तान” कहते है क्योंकि “अरबी” में “प” अक्षर नहीं है तो वो ऐसे कूद के बोला जैसे खा जायेगा कि “अरबी” में “पे” है , “पे” से “प” कि ध्वनि निकलती है, फिर वो अलिफ़, बे. पे, वर्णमाला बताने लगा. मुझे लगा कि अपने सर पे ईंट मार लूँ या उसके . मैंने उसे कहा कि “अलिफ़” “बे” “पे” फारसी कि वर्णमाला है अरबी में “अलिफ़” “बे” “ते” है . तब वो चुप हुआ. कृपया देखे कि अरबी वर्णमाला में “प” ध्वनि का प्रतिनिधि अक्षर नहीं है – http://www.madinaharabic.com/Arabic_Reading_Course/Lessons/L000_001.html अब बताये कि जब अपने धर्म ग्रन्थ कि भाषा का ही सही पता नहीं है तो यह कहाँ से विज्ञान कि खोज करेंगे . बस मुस्लमान तो कम पढ़े लिखे मुल्लों की तकरीर जो ज्यादातर जोश से भरपूर और इस्लामिक युद्धों (जिहाद) पे आधारित होती है में “नारे ए तकरीर, अल्लाह हू अकबर” के ना�

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  4. नास्तिक

    पार्ट – ४ “नारे ए तकरीर, अल्लाह हू अकबर” के नारे से मुग्ध होती है और इसी विशवास में जीती है . ऐसे सभी धर्मांध लोगों को सरकारों से कुछ नहीं मांगना चाहिए , बस व्रत, रोजे रखना चाहिए व् पूजा, नमाज़ करनी चाहिए . क्यों, सरकारों से रोजगार और खाने को मांगते है, जब अल्लाह या भगवान देगा . सब्र करें और भूखे मर भी जाये तो क्या ; मोक्ष या जन्नत मिलेगा , जहाँ भोगने के लिए अप्सराएँ या हूरें होगीं. मैं मूल विषय पे आता हूँ की इस्लाम से पूर्व अरब जगत कला, विज्ञानं, अर्थशास्त्र , गणित वास्तु कला में बहुत आगे था ग्रीक और रोमन लोगों के मिलन से इस ज्ञान में सोने पे सुहागा हो गया . बेबीलोन में जुगुरात जैसी बुलंद इमारतें , हवा में झूलते हुए बाग, सीरिया ने विश्व को लिपि व् लिखित न्याय व्यवस्था , मिस्र ने पिरामिड , मृतक शरीर का ममिकरण , फलस्तीन ने खेती , बेबीलोन ने पहिये का अविष्कार , यहूदियों ने उस काल की बेहतरीन इमारत ( सम्राट सोलोमन द्वारा बनवाया मंदिर) , ग्रीकों ने अलेक्जेन्द्रिया का पुस्तकालय व “प्रकाश स्तंभ” रोमनों की पक्की सड़कें , सीवेज प्रणाली , रोमन आर्च, बेंजाटिन सम्राटों द्वारा बनायीं गयी भव्य इमारतें आदि अनगिनित चीजें दी . लेकिन छठी सदी से ही सारी चीजों को अरबी करण शुरू हो गया . ग्रंथों को नष्ट किया गया , चर्चों व् अन्य धर्म स्थानों को मस्जिद में कन्वर्ट किया गया , अन्य भाषाएँ जैसे अरामी ( सीरिया की मातर भाषा ) को समाप्त किया गया . कहा गया अल्लाह के शब्द अरबी में है इसे सीखो क्योंकि अरबी का शुद्ध अनुवाद नहीं हो सकता . लब्बो लुआब यह है की इस्लाम धर्म ने ही मुसलमानों का सबसे बड़ा अहित किया , बुद्धि को सीमित और तर्क को जड़ से समाप्त कर दिया . छठी सदी के बाद जैसे जैसे इस्लाम अरब जगत में फैला , वहां ज्ञान विज्ञान दूर होता गया . आज मुस्लिम देश विज्ञानं और तकनीक में सबसे पीछे हैं. अब हो सकता है की “अफजाल खान” साहब पे फ़तवा आ जाए और हो सकता है की http://www.khabarkikhabar.com/ मेरे यह कमेन्ट डिलीट कर दें.

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    1. surender singh

      धर्म का मतलब नहीं पता लेकिन इसके लिए मरने मारने को तैयार रहते ह

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  5. रोहन

    बहुत ही स्तरहीन लेख क्योंकि कोई भी रेफरेंस नहीं दिया गया है . बिना एतिहासिक साक्क्षयों के आपके लेख स्तरहीन है . ऐसा लग रहा है कम पढ़े लिखे मौलवियों के मिलाद को यहाँ लेख के रूप में प्रस्तुत किया है.

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  6. Bhavin gadhvi

    प्रिय मित्र,आजकल कुछ राजनीतिक दल भ्रष्टाचार मिटाने के नाम पर आपका समर्थन मांग रहें हैं। भ्रष्टाचार के मामलों में सच जानना आपका अधिकार भी है और कर्तव्य भी। हमारा आग्रह इतना ही है कि राजनीतिक दलों के दावोंऔर आरोपों की जांच अवश्य करें औरसही फैसला लें।कृप्या इन बिन्दुओं पर ध्यान दें और पूरी जांच करनें के बाद ही अपना वोट डालें।जहां कांग्रेस 2005 में RTI कानून लाई, गुजरात में अमित जेठवा जैसे RTI कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी जाती है, जिसमें भाजपा के नेताओं के नाम स्पष्ट रुप से शामिल हैं। कांग्रेस लोकपाल बिल लाई जबकी गुजरात में 10 साल तक लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं की गई। जब राज्यपाल ने लोकायुक्त को नियुक्ति किया तो राज्य सरकार ने इसको किसी भी तरह से रोकने के लिए मुक्द्दमें में 45 करोड़ खर्च किए। Supreme Court ने गुजरात सरकार की मंत्री आनंदी बेन पटेल को एक जमीन आवंटन के मामले में दोषी पाया पर वो आज भी गुजरात सरकार में मंत्री बनी हुई हैं। 400 करोंड़ के मछली पालन घोटाले में कोर्ट द्वारा दोषी पाए गए पुरुषोत्तम सोलंकी गुजरात मंत्रीमंडल को आज भी सुशोभित कर रहे हैं। जहां कांग्रेस ने दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की, भ्रष्टाचारके मामले में जेल यात्रा कर चुकेयदुरप्पा को भाजपा पार्टी में फिर शामिल किया। कोयला आंवटन के मामले में हमेशा के लिए एक पारदर्शी नीति बनाने की नीयत से UPA सरकार नें Coal Blocks के निलामी (auction) का फैसलालिया था। CAG ने कहा है कि auction की नीति देर से लागू की गई, जिसके कारण ‘private parties’ को 1.86 lakh crore का फायदा हुआ था। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि राज्य सरकारों के दबाव के कारण भारत सरकार को 1993 की ही नीति को जबरन अपनाना पड़ा।ध्यान रहे कि इस नीति में भाजपा ने अपने 6.5 साल के शासनकाल में कोई बदलाव नहीं किया।जब नीति पुरानी थी और एक भी खान में खनन नहीं हुआ तो देश को नुक्सान कैसे हुआ। CBI उन मामलों की जांच कर रही है, जिसमें सरकारी विभाग के अधिकारियों ने procedures का पालननहीं किया और कानून दोषियों को सजा देगा।2G आवंटन मामलें में भी कहानी कुछ ऐसी ही है। इस मामलें के दो पहलू हैं, पहला सरकार की नीति क्या थी और दूसरा ए राजा ने किस तरह से इस नीति को लागू किया।राजा के खिलाफ मामला कोर्ट में है और अगर कोई अपराध हुआ है तो उन्हे कड़ी से कड़ी सजा मिलेगी।जहां तक नीति का सवाल है, ��
    Ye sb hi sampradayik hai sale. Andhi nhi tofan hai bharat ki shan hai. Jai ho modi

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  7. jitendar parsad

    Aap ke lekh se sahmat hu, magar musalman hindu se jyada pichde hue hai jab ke musalman population me dusre number pe hai.

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  8. surya sharma

    धन्यवाद अफजल साहब, आपने बिल्कुल सही फरमाया है, वास्तव मे सिवाय खूनखराबा ओर लड़ाई झगडो के सिवाय इन दोनो कोमो ने कुछ नही किया है. देश को आज़ाद होकर भी 65 वर्ष हो चुके है किन्तु इन दोनो को आपसी हिंसा ओर दंगो से फुर्सत ही नही है, हम हर बात पर पाकिस्तान को दोष नही देसकते है, कुछ कमी तो हमारे भीतर है जिसका फायदा यह दोगले नेता उठा रहे है. जब तक आपसी दुश्मनी भूल कर उन्नति के लिये नही सोचोगे, यह देश उन्नति नही कर पायेगा. सूर्य

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  9. mahendar singh

    जो कौम धर्म धर्म चिल्लायेगी वो ऐसे ही पीछे रहेगी. जैसे मुसलमानो को लगता है की कुरान मे सब कुछ बता ही दिया गया और हिन्दुओ को लगता है की उनसे महान कोई धर्म ही नही है. जब तक इस धर्म और अंधविस्वास की बेड़ियो से आज़ाद नही होगे आप नया कुछ सोच नही सकते (हो सकता है आप खुद भी इस बात से सहमत नही होंगे!) दुनिया मे सारी मारकाट धर्म के नाम पर ही चलती रहती है जवाब दें

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  10. Seraj akram

    बहुत अच्छा लिखा, हिन्दू के बारे मे तो कुछ नही कह सकते क्योंकि यह ज़्यादह देशो मे नही है और भारत मे तकरीबन 1000 सल से दूसरे लोग शासन किया है, लेकिन मुस्लिम तो वास्तव मे सोई हुई कौम लगती है जब आप विकास, साइंस और टेक्नोलॉजी मे उनके योगदान को देखे तो. आज हिन्दू फिर भी बेहतर कर रहे है, लेकिन मुस्लिम को तो आज भी समझ मे नही आता की दुनिया कहन से कहन चली गई है और यह लोग किधर है. आज भी जब आप इन पैमाने पर बत करेंगे तो इतनी मूरखता वाली बत सुनने को मिलेगी की यकीन नही आयेगा. मुस्लिम के लिये बहुत ही शर्मिंदगी की बत है.

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  11. akhtar husain gauri

    बहुत ही चौंकानेवाला लेख है फतवा लगानेवाले ईसाई और यहूदियों के बनाये अविष्कार धड़ल्ले से मज़े लेकर इस्तेमाल करते है लेकिन मुखालफत करने में अव्वल हिन्दू और मुस्लिम दोनों ही ,यहूदी ,और ईसाईयों का कड़ा विरोध करते ह लेकिन फिर भी उन्ही के दिए हुए अविष्कारों पर निर्भर ह ये दोगलापन नहीं है तो और या है

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  12. neeraj sharma

    खाँ साहब लेख तो अच्छा है पर आपसे कुछ प्रश्न है
    1) यदि यहूदी और ईषाई इतने बड़े वैज्ञानिक है तो आज तक मौत की गुथ्थी क्योँ नहीँ सुलझा सके?
    2 जब हम हर तरफ से निराश हो जाते है तो सबकुछ उस परम शक्ति पर क्योँ छोड़ देते है?
    3 इस शरीर मेँ रूह कहाँ निवास करती है?
    4 हम कहाँ से और क्योँ आये हैँ? 5 हम कहाँ जायेगेँ और क्योँ जायेगेँ हैँ?
    प्रश्न तो बहौत है पर आप इन्ही का हल खोज लीजिये और हाँ जवाब जरूर दीजियेगा

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    1. Jose

      aap kabhi witness Lee ya watchman nee ki books Padkar dekhen sare jawaab mil jayenge mere priye bhai

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    2. Ashiyan Tiru

      नीरज शर्मा जी,
      जिस मैटर को पढ़कर आपने जो सवाल उठाऐं हैं पहले उनके बारे मे तो अपनी प्रतिक्रिया बताऐं.

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    3. Ankit

      Sharma g….pahle aap jaiye aur us scripture KO padhiye jispar Jews aur Christian believe karte hain……the holy bible……aapke saare answers mil jaayenge…..mera ek chhota sa jawab……god mere weakness me Mera strength hai…..

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  13. mohd shariq

    in janab ko koi y btaye ki industrial revolution ki shuruaat me saal 1800 me india ek gulaam desh tha ar us time pr hme achha khana ar human rights hi ni mil paate the to invention kha se krte….ar rhi bat england ar America ki to england kbhi gulaam ni hua ar America 1755 me aazaad ho gya tha…india 1947 me aazaad hua china se b 50 saal bad ar aaj ham mars mission me kamyab h jo abi tk kewal America tha…ham 6th parmanu shakti h….bollywood dunia ki doosri sbse bdi film industry h…hmari economy top 5 me h
    ha hmari mentality ko thode bht sudhaar ki zroorat h lekin hindu ar musalman mtlb hindustaan ne sabse tezi se tarakki ki h

    hmesha negative mt likha kro

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    1. Ankit

      Thank god…..angrej bharat me aaye warna ye Hindu aapas me….aur Muslim aapas me sinhasan क liye lad rahe hotay abhi tak…..kam se kam ye sabhi apni jagah to pahuche…ekjut to huye..Christians ki wajah se….aur other countries se competition k laayak banay…..

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  14. avinash

    aaisa hai afazal bhai hi abhi aap 5 vi cenchuy ki history padiye pta chal jayega ki INDIA ma kitani education thi.

    samjhe bina knowledge ke mat artical likha kariye

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  15. zakir hussain

    विज्ञान से विमुख, अत्यंत रूढ़िवादी, दकियानूसी व्यक्ति, आज़ाद सोच वाले लोगो की उपलब्धियो के सर पे अपनी धार्मिक किताबो का ताज पहनना चाहते है. ऐसा वो अपनी विज्ञान मे पिछड़ेपन की हीनता की प्रतिक्रिया मे करते हैं.
    सही है, सफलता के अनेक रिश्तेदार होते हैं. तो हिंदू और मुसलमान भी हो गये. हालाँकि एक छोटी सा तर्क इन तर्कहीन कुए के मेंढको से करना चाहता हूँ कि इन धार्मिक किताबो मे इतना ही रहस्य छुपा है, तो क्यूँ तुम्हारे संस्कृत महाविद्यालय और तब्लिगियो की जमाते नोबल विजेता नही दे पा रही?

    ये धरती पे बोझ है.

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    1. संजीव कुमार दुबे

      ये ले हिन्दूओं की नोबल विजेताओं की लिस्ट तूं तेरी उस आसमानी चंपक को लपेट कर तेरी गांङ में ठूस ले….
      रविंद्रनाथ टैगोर
      टैगोर भारत के पहले नोबेल पुरस्कार विजेता थे जिन्हें
      साहित्य के क्षेत्र में योगदान के लिए इस पुरस्कार से
      नवाज़ा गया था.
      टैगोर को 1913 में जब ये सम्मान मिला तब वो ये पुरस्कार
      पाने वाले पहले गैर यूरोपीय थे.
      हरगोविंद खुराना
      जाने माने भारतीय मूल के वैज्ञानिक हरगोविंद खुराना को
      1968 में मेडिसीन के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार मिला था.
      खुराना का शोध इस विषय पर था कि एंटी बायोटिक खाने
      का शरीर पर किस तरह का व्यापक असर होता है. भारत के
      पंजाब में जन्मे खुराना ने आगे चलकर अमरीका के जाने माने
      एमआईटी इंस्टीट्यूट से पढ़ाई की थी और अमरीका में ही
      बस गए थे.
      सीवी रमण
      मद्रास में 1888 में जन्मे सीवी रमण का योगदान
      फिजिक्स विषय में था और उन्होंने प्रकाश से जुड़े जिन
      प्रभावों की खोज की थी उन्हें रमन इफेक्ट के नाम से जाना
      जाता है.
      उन्हें 1930 में फिजिक्स के क्षेत्र में ये पुरस्कार दिया
      गया.
      वीएएस नायपॉल
      त्रिनिदाद एंड टोबैगो में जन्मे विद्याधर सूरजप्रसाद
      नायपॉल के पूर्वज गोरखपुर से गिरमिटिया मज़दूर के रुप में
      त्रिनिदाद पहुंचे थे.
      नायपॉल के उपन्यासों में भारत को काफी महत्व दिया गया
      लेकिन भारत को लेकर उनका नज़रिया काफी विवादित भी
      रहा.
      ब्रिटेन में बसे नायपॉल को 2001 में साहित्य के क्षेत्र में
      उनके योगदान के लिए नोबेल दिया गया.
      वेंकट रामाकृष्णन
      भारतीय मूल के वेंकट रामाकृष्णन मदुरै में जन्मे थे और इस
      समय कैंब्रिज़ में पठन पाठन करते हैं. उन्हें वर्ष 2009 में
      राइबोसोम के स्ट्रक्चर और कार्यप्रणाली के क्षेत्र में
      शोध के लिए केमिस्ट्री का नोबेल पुरस्कार दिया गया था.
      बीबीसी हिंदी के साथ बातचीत में उन्होंने कहा था कि हर
      वैज्ञानिक ये सोचकर काम नहीं करता कि उसे नोबेल
      पुरस्कार मिलेगा.
      सुब्रहमण्यम चंद्रशेखर
      चंद्रशेखर का जन्म 1910 में लाहौर में हुआ था और उनकी
      पढ़ाई अमरीका में हुई. उनका विषय एस्ट्रोफिजिक्स था
      और उन्हें 1983 में सितारों की आकृति और कैसे सितारे बने
      इसके सैद्धांतिक शोध के लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार मिला.
      कैलाश सत्यार्थी
      वर्ष 2014 का शांति का नोबेल पुरस्कार कैलाश सत्यार्थी
      को मिला है. कैलाश को बच्चों के लिए किए गए उनके काम
      को देखते हुए ये पुरस्कार दिया गया है.
      आर के पचौरी
      राजेंद्र पचौरी का काम पर्यावरण के क्षेत्र में था और वो
      लंबे समय तक टेरी (टाटा एनर्जी रिसर्च इंस्टीट्यूट) से जुड़े
      रहे.
      उनके शोध पत्र जलवायु परिवर्तन पर थे और उन्हें वर्ष
      2007 में संयुक्त राष्ट्र की जलवायु परिवर्तन के लिए बनी
      कमिटी के साथ संयुक्त रुप से शांति के लिए नोबेल मिला
      था.
      अमर्त्य सेन
      भारतीय मूल के अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन अपनी पुस्तक द
      आरग्यूमेंटेटिव इंडियन के लिए काफी चर्चित रहे लेकिन
      अर्थशास्त्र में उनका काम उल्लेखनीय रहा है.
      उन्हें 1998 में नोबेल पुरस्कार दिया गया था अर्थशास्त्र
      के क्षेत्र में.

      Reply
  16. Nikhil

    Ab mai kya khu
    Jo apne desh kaa naa ho ska usse or kya ummid ki ja skti hai
    Kuch logo k DNA mai hi hota hai ye SB

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  17. संजीव कुमार दुबे

    ये कमेन्ट हिन्दूओं की खोज के विषय में बता देगी पुरातन और नवीन बाकी तुम्हारा क्या तुम झंखों उस आसमानी चंपक को लेकर…..
    जहां थूंक और उटनी के मुत से ईलाज होता हो वो ढूढ भी क्या सकते हैं……?
    हिन्दू नहीं कभी समाज देश या विश्वपर बोझ रहा है ना होगा……
    तुम कटुवालोग अपनी गलतीयों को छुपाने के लिए अपने साथ हिन्दूओं को क्युं जोङ लेते हो.? कुछ हुवा तो हिन्दू काफिर है बोलकर दूर भागों गे जब विश्व समुदाय से आंखमिलाकर बात करने का समय आयेगा तो तो अपनी गलतियों के तुरन्त साझेदार के रुप में हिन्दूओं को मिला लोगे….
    कटुवो आसमानी चंपक से आगे सोचना शुरु करो तभी कुछ खोज पाओगें नहीं तो अभी जबतक हिन्दू रुपी छप्पर है तबतक तो सर छुपालोगे उसके बाद.?
    हजारों साल पहले ऋषियों के आविष्कार, पढ़कर रह जाएंगे हैरान | असाधारण या यूं कहें कि प्राचीन वैज्ञानिक ऋषि-मुनियों द्वारा किए आविष्कार व उनके द्वारा उजागर रहस्यों को जिनसे आप भी अब तक अनजान होंगे – ● महर्षि दधीचि – महातपोबलि और शिव भक्त ऋषि थे। वे संसार के लिए कल्याण व त्याग की भावना रख वृत्तासुर का नाश करने के लिए अपनी अस्थियों का दान करने की वजह से महर्षि दधीचि बड़े पूजनीय हुए। इस संबंध में पौराणिक कथा है कि एक बार देवराज इंद्र की सभा में देवगुरु बृहस्पति आए। अहंकार से चूर इंद्र गुरु बृहस्पति के सम्मान में उठकर खड़े नहीं हुए। बृहस्पति ने इसे अपना अपमान समझा और देवताओं को छोड़कर चले गए। देवताओं ने विश्वरूप को अपना गुरु बनाकर काम चलाना पड़ा, किंतु विश्वरूप देवताओं से छिपाकर असुरों को भी यज्ञ-भाग दे देता था। इंद्र ने उस पर आवेशित होकर उसका सिर काट दिया। विश्वरूप त्वष्टा ऋषि का पुत्र था। उन्होंने क्रोधित होकर इंद्र को मारने के लिए महाबली वृत्रासुर को पैदा किया। वृत्रासुर के भय से इंद्र अपना सिंहासन छोड़कर देवताओं के साथ इधर-उधर भटकने लगे। ब्रह्मादेव ने वृत्तासुर को मारने के लिए वज्र बनाने के लिए देवराज इंद्र को तपोबली महर्षि दधीचि के पास उनकी हड्डियां मांगने के लिये भेजा। उन्होंने महर्षि से प्रार्थना करते हुए तीनों लोकों की भलाई के लिए अपनी हड्डियां दान में मांगी। महर्षि दधीचि ने संसार के कल्याण के लिए अपना शरीर दान कर दिया। महर्षि दधीचि की हड्डियों से वज्र बना और वृत्रासुर मारा गया। इस तरह एक महान ऋषि के अतुलनीय त्याग से देवराज इंद्र बचे और तीनों लोक सुखी हो गए। ● आचार्य कणाद – कणाद परमाणुशास्त्र के जनक माने जाते हैं। आधुनिक दौर में अणु विज्ञानी जॉन डाल्टन के भी हजारों साल पहले आचार्य कणाद ने यह रहस्य उजागर किया कि द्रव्य के परमाणु होते हैं। ● भास्कराचार्य – आधुनिक युग में धरती की गुरुत्वाकर्षण शक्ति (पदार्थों को अपनी ओर खींचने की शक्ति) की खोज का श्रेय न्यूटन को दिया जाता है। किंतु बहुत कम लोग जानते हैं कि गुरुत्वाकर्षण का रहस्य न्यूटन से भी कई सदियों पहले भास्कराचार्यजी ने उजागर किया। भास्कराचार्यजी ने अपने ‘सिद्धांतशिरोमणि’ ग्रंथ में पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के बारे में लिखा है कि ‘पृथ्वी आकाशीय पदार्थों को विशिष्ट शक्ति से अपनी ओर खींचती है। इस वजह से आसमानी पदार्थ पृथ्वी पर गिरता है’। ● आचार्य चरक – ‘चरकसंहिता’ जैसा महत्तवपूर्ण आयुर्वेद ग्रंथ रचने वाले आचार्य चरक आयुर्वेद विशेषज्ञ व ‘त्वचा चिकित्सक’ भी बताए गए हैं। आचार्य चरक ने शरीरविज्ञान, गर्भविज्ञान, औषधि विज्ञान के बारे में गहन खोज की। आज के दौर की सबसे ज्यादा होने वाली डायबिटीज, हृदय रोग व क्षय रोग जैसी बीमारियों के निदान व उपचार की जानकारी बरसों पहले ही उजागर की। ● भारद्वाज – आधुनिक विज्ञान के मुताबिक राइट बंधुओं ने वायुयान का आविष्कार किया। वहीं हिंदू धर्म की मान्यताओं के मुताबिक कई सदियों पहले ऋषि भारद्वाज ने विमानशास्त्र के जरिए वायुयान को गायब करने के असाधारण विचार से लेकर, एक ग्रह से दूसरे ग्रह व एक दुनिया से दूसरी दुनिया में ले जाने के रहस्य उजागर किए। इस तरह ऋषि भारद्वाज को वायुयान का आविष्कारक भी माना जाता है। ● कण्व – वैदिक कालीन ऋषियों में कण्व का नाम प्रमुख है। इनके आश्रम में ही राजा दुष्यंत की पत्नी शकुंतला और उनके पुत्र भरत का पालन-पोषण हुआ था। माना जाता है कि उसके नाम पर देश का नाम भारत हुआ। सोमयज्ञ परंपरा भी कण्व की देन मानी जाती है। ● कपिल मुनि – भगवान विष्णु का पांचवां अवतार माने जाते हैं। इनके पिता कर्दम ऋषि थे। इनकी माता देवहूती ने विष्णु के समान पुत्र चाहा। इसलिए भगवान विष्णु खुद उनके गर्भ से पैदा हुए। कपिल मुनि ‘सांख्य दर्शन’ के प्रवर्तक माने जाते हैं। इससे जुड़ा प्रसंग है कि जब उनके पिता कर्दम संन्यासी बन जंगल में जाने लगे तो देवहूती ने खुद अकेले रह जाने की स्थिति पर दुःख जताया। इस पर ऋषि कर्दम देवहूती को इस बारे में पुत्र से ज्ञान मिलने की बात कही। वक्त आने पर कपिल मुनि ने जो ज्ञान माता को दिया, वही ‘सांख्य दर्शन’ कहलाता है। इसी तरह पावन गंगा के स्वर्ग से धरती पर उतरने के पीछे भी कपिल मुनि का शाप भी संसार के लिए कल्याणकारी बना। इससे जुड़ा प्रसंग है कि भगवान राम के पूर्वज राजा सगर ने द्वारा किए गए यज्ञ का घोड़ा इंद्र ने चुराकर कपिल मुनि के आश्रम के करीब छोड़ दिया। तब घोड़े को खोजते हुआ वहां पहुंचे राजा सगर के साठ हजार पुत्रों ने कपिल मुनि पर चोरी का आरोप लगाया। इससे कुपित होकर मुनि ने राजा सगर के सभी पुत्रों को शाप देकर भस्म कर दिया। बाद के कालों में राजा सगर के वंशज भगीरथ ने घोर तपस्या कर स्वर्ग से गंगा को जमीन पर उतारा और पूर्वजों को शापमुककिया। ● पतंजलि – आधुनिक दौर में जानलेवा बीमारियों में एक कैंसर या कर्करोग का आज उपचार संभव है। किंतु कई सदियों पहले ही ऋषि पतंजलि ने कैंसर को रोकने वाला योगशास्त्र रचकर बताया कि योग से कैंसर का भी उपचार संभव है। ● शौनक – वैदिक आचार्य और ऋषि शौनक ने गुरु-शिष्य परंपरा व संस्कारों को इतना फैलाया कि उन्हें दस हजार शिष्यों वाले गुरुकुल का कुलपति होने का गौरव मिला। शिष्यों की यह तादाद कई आधुनिक विश्वविद्यालयों तुलना में भी कहीं ज्यादा थी। ● महर्षि सुश्रुत – ये शल्यचिकित्सा विज्ञान यानी सर्जरी के जनक व दुनिया के पहले शल्यचिकित्सक (सर्जन) माने जाते हैं। वे शल्यकर्म या आपरेशन में दक्ष थे। महर्षि सुश्रुत द्वारा लिखी गई ‘सुश्रुतसंहिता’ ग्रंथ में शल्य चिकित्सा के बारे में कई अहम ज्ञान विस्तार से बताया है। इनमें सुई, चाकू व चिमटे जैसे तकरीबन 125 से भी ज्यादा शल्यचिकित्सा में जरूरी औजारों के नाम और 300 तरह की शल्यक्रियाओं व उसके पहले की जाने वाली तैयारियों, जैसे उपकरण उबालना आदि के बारे में पूरी जानकारी बताई गई है। जबकि आधुनिक विज्ञान ने शल्य क्रिया की खोज तकरीबन चार सदी पहले ही की है। माना जाता है कि महर्षि सुश्रुत मोतियाबिंद, पथरी, हड्डी टूटना जैसे पीड़ाओं के उपचार के लिए शल्यकर्म यानी आपरेशन करने में माहिर थे। यही नहीं वे त्वचा बदलने की शल्यचिकित्सा भी करते थे। ● वशिष्ठ – वशिष्ठ ऋषि राजा दशरथ के कुलगुरु थे। दशरथ के चारों पुत्रों राम, लक्ष्मण, भरत व शत्रुघ्न ने इनसे ही शिक्षा पाई। देवप्राणी व मनचाहा वर देने वाली कामधेनु गाय वशिष्ठ ऋषि के पास ही थी। ● विश्वामित्र – ऋषि बनने से पहले विश्वामित्र क्षत्रिय थे। ऋषि वशिष्ठ से कामधेनु गाय को पाने के लिए हुए युद्ध में मिली हार के बाद तपस्वी हो गए। विश्वामित्र ने भगवान शिव से अस्त्र विद्या पाई। इसी कड़ी में माना जाता है कि आज के युग में प्रचलित प्रक्षेपास्त्र या मिसाइल प्रणाली हजारों साल पहले विश्वामित्र ने ही खोजी थी। ऋषि विश्वामित्र ही ब्रह्म गायत्री मंत्र के दृष्टा माने जाते हैं। विश्वामित्र का अप्सरा मेनका पर मोहित होकर तपस्या भंग होना भी प्रसिद्ध है। शरीर सहित त्रिशंकु को स्वर्ग भेजने का चमत्कार भी विश्वामित्र ने तपोबल से कर दिखाया। ● महर्षि अगस्त्य – वैदिक मान्यता के मुताबिक मित्र और वरुण देवताओं का दिव्य तेज यज्ञ कलश में मिलने से उसी कलश के बीच से तेजस्वी महर्षि अगस्त्य प्रकट हुए। महर्षि अगस्त्य घोर तपस्वी ऋषि थे। उनके तपोबल से जुड़ी पौराणिक कथा है कि एक बार जब समुद्री राक्षसों से प्रताड़ित होकर देवता महर्षि अगस्त्य के पास सहायता के लिए पहुंचे तो महर्षि ने देवताओं के दुःख को दूर करने के लिए समुद्र का सारा जल पी लिया। इससे सारे राक्षसों का अंत हुआ। ● गर्गमुनि – गर्ग मुनि नक्षत्रों के खोजकर्ता माने जाते हैं। यानी सितारों की दुनिया के जानकार। ये गर्गमुनि ही थे, जिन्होंने श्रीकृष्ण एवं अर्जुन के के बारे नक्षत्र विज्ञान के आधार पर जो कुछ भी बताया, वह पूरी तरह सही साबित हुआ। कौरव- पांडवों के बीच महाभारत युद्ध विनाशक रहा। इसके पीछे वजह यह थी कि युद्ध के पहले पक्ष में तिथि क्षय होने के तेरहवें दिन अमावस थी। इसके दूसरे पक्ष में भी तिथि क्षय थी। पूर्णिमा चौदहवें दिन आ गई और उसी दिन चंद्रग्रहण था। तिथि- नक्षत्रों की यही स्थिति व नतीजे गर्ग मुनिजी ने पहले बता दिए थे। ● बौद्धयन – भारतीय त्रिकोणमितिज्ञ के रूप में जाने जाते हैं। कई सदियों पहले ही तरह-तरह के आकार-प्रकार की यज्ञवेदियां बनाने की त्रिकोणमितिय रचना- पद्धति बौद्धयन ने खोजी। दो समकोण समभुज चौकोन के क्षेत्रफलों का योग करने पर जो संख्या आएगी, उतने क्षेत्रफल का ‘समकोण’ समभुज चौकोन बनाना और उस आकृति का उसके क्षेत्रफल के समान के वृत्त में बदलना, इस तरह के कई मुश्किल सवालों का जवाब बौद्धयन ने आसान बनाया।

    प्रफुल चंद्र राय (1861-1944)
    प्रसिद्ध शिक्षाविद् और रसायनज्ञ. प्रफुल चंद्र राय को भारत की पहली फार्मास्यूटिकल कंपनी, बंगाल रसायन एवं फार्मास्यूटिकल्स के संस्थापक के रूप में जाना जाता है. रसायन और फार्मास्यूटिकल्स के क्षेत्र में इनका इस तरह का योगदान काफी अहम रहा है.

    श्रीनिवास रामानुजन् (1887 – 1920)
    श्रीनिवास रामानुजन् एक महान भारतीय गणितज्ञ थे. इन्हें आधुनिक काल के महानतम गणित विचारकों में गिना जाता है. इन्हें गणित में कोई विशेष प्रशिक्षण नहीं मिला, फिर भी इन्होंने विश्लेषण और संख्या सिद्धांत के क्षेत्रों में गहन योगदान दिए.

    चन्द्रशेखर वेंकट रामन (1888 – 1970)
    चन्द्रशेखर वेंकट रामन भारतीय भौतिक-शास्त्री थे. प्रकाश के प्रकीर्णन पर बेहतरीन कार्य के लिये वर्ष 1930 में उन्हें भौतिकी का प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार दिया गया. उनका आविष्कार उनके ही नाम पर रामन प्रभाव के नाम से जाना जाता है.

    जगदीश चन्द्र बसु (1858 – 1937)
    डॉ. जगदीश चन्द्र बसु भारत के प्रसिद्ध वैज्ञानिक थे. इन्हें भौतिकी, जीवविज्ञान, वनस्पति विज्ञान और पुरातत्व का गहरा ज्ञान था. वे ऐसे पहले वैज्ञानिक थे जिन्होंने रेडियो और सूक्ष्म तरंगों की प्रकाशिकी पर काम किया.

    सत्येन्द्रनाथ बोस (1894 – 1974)
    सत्येन्द्रनाथ बोस भारतीय गणितज्ञ और भौतिक शास्त्री हैं. भौतिक शास्त्र में दो प्रकार के अणु माने जाते हैं – बोसान और फर्मियान. इनमे से बोसान सत्येन्द्र नाथ बोस के नाम पर ही हैं.

    हरगोविन्द खुराना (1922 – 2011)
    हरगोविंद खुराना नोबेल पुरस्कार से सम्मानित भारतीय वैज्ञानिक थे. इन्हें बायोकेमिस्ट के क्षेत्र में अहम योगदान के लिए 1968 में इस पुरस्कार से नवाजा गया था.

    श्रीराम शंकर अभयंकर (1930 – 2012)
    श्रीराम शंकर अभयंकर बीजगणितीय ज्यामिति में उनके योगदान के लिए विख्यात भारतीय गणितज्ञ हैं.

    Reply
    1. भास्कर

      अगर भारत पर विदेशी मुस्लिम आक्रमण नही होते तो आर्यभट्ट ब्रह्मगुप्त वराहमिहिर चरक आदि वैज्ञानिक ने जो खोजे की थी उसका विकास होता यही नही रामानुजन तो हाल ही के थे लेक वो जो जानते थे उसे जानने में अमेरिका को लाखो वर्ष लग जायेंग

      Reply
  18. gulab yadav

    Afzal bhai agar Europe ne itni tarakki Ki hai to ozone layer kyu ghat raha hai.global warming kya hai.logo ko saf pani bhojan nahi mil raha.log bimar hai.ye sab European logo Ku drn hai.bharat ke logo ne Jo bhi khoj Ki prakriti ko nooksan na pahuchakar Ki wo jante the prakruti ko chedne se hamara hi nooksan hai.aah sari dunya tabah hai in sab invention Ki wajah se.

    Reply
  19. afzal khan

    गुलब यादव

    खबर की खबर में आपका स्वागत है ! आपके कमेंट , लेख या सुझाव का हमें इंतजार रहेगा !

    Reply
  20. prasad joshi

    World war १- १५ million death
    World war २- २२ million death
    Hitllor killed ६ million Jews,
    america bombed nuclear weapon on Japan २ lakhs death.
    British & French war pre १९०० century,
    America Russia cold war-( Korea war, Vietnam war,Afghanistan war)

    Reason of every war is to conquer natural resources like water, land, oil, minerals & human ego.

    Reply
  21. Amit

    तुम मुस्लिम ही धरती पर बोझ हो

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