muslim

by –ताबिश सिद्दीकी

( 1 ) मुझे याद है जब किसी ने पैगम्बर इस्लाम का कार्टून बनाया था.. मेरा दोस्त अपने अंकल के साथ पाकिस्तान गया हुवा था क्रिकेट मैच देखने.. वो लोग थोडा घूमने टहलने का मज़ा ही ले रहे थे की अचानक कट्टरपंथियों की भीड़ से सामना हुवा.. जो हाथों में खुली तलवार लिए सड़कों पर आग लगते हुवे चल रहे थे.. मेरा दोस्त इतना डर गया और उसे लगा कि अब उसका आखिरी समय आ गया.. मगर फिर वहीं एक टैक्सी वाले ने अपनी जान पर खेलकर उन लोगों को बॉर्डर तक पहुँचाया और किराया भी नहीं लिया!

उम्र बीती जा रही है हमारी फतवों और कट्टर इस्लामिक असहनशीलता देखते हुवे और ताज्जुब होता है जब मुसलमान कहते हैं की PK में आखिर ऐसा क्या था जो लोगों को बुरा लगा? माफ़ कीजियेगा .. आप लोगों के मुह से ऐसी बातें कुछ अच्छी नहीं लगती.. अगर ये फिल्म इस्लाम पर पूरी तरह निर्भर होती तो अभी तक सीन कुछ और ही होता.. आगज़नी.. तोड़फोड़.. जाने कितने फतवे आमिर और पूरी टीम का गला काटने के लिए आ चुके होते.. और सबसे बड़ी बात कि अन्य देशों पर दबाव होता कि इसको रिलीज़ न किया जाए.. कितने समझदार और सहनशील बन जाते हैं हम जब बात दुसरे धर्म की हो.. है न?

ये आपको स्वीकार करना ही होगा की बहुसंख्यक हिन्दू हमसे कहीं कहीं ज्यादा सहनशील हैं.. कुछ मुठ्ठी भर कट्टर लोगों को छोड़कर.. मगर मुसलमान बहुसंख्यक में असहनशील हैं.. कुछ मुठ्ठी भर सहनशीलों को छोड़कर.

मैं तो चाहूँगा की धार्मिक आडम्बरों के खिलाफ फिल्मे बने.. और अब आमिर कह रहे हैं कि PK का दूसरा पार्ट बनेगा और मुझे ये उम्मीद है की इस बार इसका केंद्र इस्लाम रहेगा.. और उसमे पर्दा प्रथा और दहेज़ प्रथा का विरोध नहीं होना चाहिए.. सीधे सीधे कट्टर इस्लामिक ढोंग पर हमला हो.. अगर ये नहीं हुवा तो मैं आमिर और उनकी टीम को मौका परस्त ही समझूंगा

( 2 )वतो इज्जो मंतो शा वतो ज़िल्लो मंतो शा

(अल्लाह जिसे चाहे इज्ज़त दे और जिसे चाहे ज़िल्लत दे) – कुरआन सूरा अल इमरान 26

अल्लाह ने मोदी को pm बनाया.. अल्लाह ने आरएसएस वालों को भी बनाया.. अल्लाह ने हिन्दू बनाया.. अल्लाह ने मुसलमान बनाया.. अल्लाह ने यहूदी बनाया.. अल्लाह ने तालिबान को बनाया.. अल्लाह ने isis को बनाया.. अल्लाह ने बोको हरम वालों को बनाया.. अल्लाह ने लादेन को बनाया.. अल्लाह ने अमेरिका को इतना ताकतवर बनाया.. अल्लाह ने लादेन को भी ताकत दी.. मुसलमान अगर ज़िल्लत उठा रहे हैं तो वो भी अल्लाह के वजह से ही

आप इस बात पर गौर कीजिये कि जो बात ऊपर कही गयी है उनमे से आप ऐसा नहीं कर सकते की एक को गलत मानिए और एक को सही.. अगर एक बात गलत है तो सब गलत होगी और एक सही है तो सब सही होगी.. आप अपने हिसाब से अपने धर्म और अल्लाह के कार्यों की व्याख्या नहीं कर सकते हैं.. आपको हर बात को स्वीकार करना होगा की सब अल्लाह का किया है नहीं तो हर बात से इनकार करना होगा की कुछ भी अल्लाह ने नहीं किया है..

अगर आप धार्मिक हैं और सच्चे हैं और ये स्वीकार कर सकें की सब उसी का किया धरा है जिसको आप अपना भगवान / अल्लाह मानते हैं.. और ये दिल से मान लें तो सारे इर्ष्या और द्वेष उसी दिन समाप्त हो जायेंगे

( 3 ) राजनीति पर क्या लिखा जाए.. दिन रात हम और आप राजनीति ही तो देखते हैं टीवी और अखबारों में.. सारे न्यूज़ चैनल और अखबार मिलकर राजनीति के द्वारा मनुष्य जाती के उत्थान में लगे हुवे हैं और उसके बाद भी क्या मेरा लिखना ज़रूरी है की कश्मीर का cm कोई हिन्दू हो या मुस्लिम?

ऐसे ऐसे बुद्धिजीवी और इसी में फंसे रहते हैं की कौन CM बने और कौन PM.. हमारे सारे टीवी चैनल दिन रात हमे राजनीति और धार्मिक कर्म काण्ड ही दिखाते रहते हैं.. उसके बाद भी लोगों का पेट नहीं भर रहा और आत्मा तृप्त नहीं हो रही.. आत्मा इस राजनीति से तृप्त नहीं होगी.. क्यूंकि न तो आतंकवाद हिन्दू CM बनने से समाप्त होगा और न मुस्लिम.. जिस क्षेत्र में मुस्लिम बहुसंख्यक होते हैं वहां पार्टियाँ मुस्लिम उम्मेदवार उतरती हैं और जहाँ हिन्दू बाहुल्य वहां हिन्दू.. और आपको लगता है पार्टी धर्मनिरपेक्ष हो कर आपके हित का सोच रही है..

राजनीति पूरी तरह से धर्म (सम्प्रदाय) पर आधारित है भारत की और जब तक धर्म राजनीति से जुड़ा रहेगा तब तक आप किसी को भी CM या PM बनाओ.. कुछ नहीं होना है.. क्यूंकि जो कुछ भी करना है आप ही करोगे.. जब तक हमारी अपनी चेतना का विकास न होगा तो कोई भी PM हमारा उद्धार नहीं कर पायेगा.. जिन देशों में धर्म और राजनीति अलग अलग रही हैं वोही देश आगे बढ़ पाया है और जहाँ धर्म हावी रहा है वहां सिवाए पतन के और कुछ न हुवा..

धर्म और राजनीति अलग अलग होती तो इस पर लिखा जाता.. यहाँ हर चीज़ का आधार धर्म ही है इसलिए धर्म ही पहले समझ लिया जाए तो अच्छा है.. सच्ची राजनीति का समय अभी नहीं आया है भारत में.. अभी हम सब धार्मिक ही हैं.. राजनितिक बिलकुल नहीं.