assam_violence

आरोप तो मुसलमानो पर लगाया जाता है की “ये मुस्लिम पाकिस्तानप्रस्त है”…..लेकिन समझ मे नही आ रहा की जो पिछले एक हफ्ते तक पेशावर हमले का रोना रो कर”IndiaWithPakistan” का प्रचम लहराते हुये आतंकवाद की आड़ ले कर एक विशेष समुदाय पर निशाना साध रहे थे वो भारत मे बोडो आतंकियो के द्वारा करीब 54 भारतीयो के कत्ल-ए-आम पर बिल्कुल खामोश है…..बड़ी अजीब बात है मियाँ पाकिस्तानियो के लिये तो आपके आँसू नही रुक रहे थे एक के बाद एक स्टेटस तो कैंडल मार्च लेकिन हमारे अपने भारतीय की हत्या पर ये खामोशी….कही आपको भारतीय के खून से अधिक पाकिस्तानियो के खून से तो प्रेम नही….???…बोलो बोलो….चुप मत रहो
कुछ समझ मे आया आप लोगों को । मुझे विश्वास है की आप सब के मशतिष्क मे ये बात नहीं घुसी होगी !!!!!! अब इसे इस प्रकार समझिए ?????

मनुवादियों की जो व्यवस्था है उस व्यवस्था को मूलनिवासियों पर थोपने का जो कार्यक्रम है उस कार्यक्रम को मै ब्राह्मणीकरण मानता हूं। क्योंकि ब्राह्मण का जो धर्म है, ब्राह्मण कहते हैं कि वह धर्म है। किन्तू हम कहते हैं कि वो एक षड्यंत्र है। इस षड्यंत्र को भारत का मुस्लिम किस हद तक अब समझने लगा है यह भी एक पहेली है । ब्राह्मणों ने समाज नहीं बल्कि मूलनिवासियों को विभाजित करने का षड्यंत्र रचा था । यानि 3.5% ब्राह्मण 90% पर रूल कर सकें परन्तु और किन्तु का कशमकश एक नई धारा को जन्म दे देगी ये इन ब्राह्मणो को जब पता चला तो तिलमिलाहट मे जो दूरगामी परभाव खतरनाक तो था ही इसलिए इसे तत्काल लागू करना पड़ा । इसको आप ऐसे समझ सकते हैं ;-

वे वर्ण व्यवस्था बनाकर हमें विभाजीत करते हैं फिर वर्ण व्यवस्था का विखंडन शने शने बिखण्डित होकर जाति व्यवस्था बनती जाती है और तब समाज चार टुकड़ों में विभाजित होने की बजाय 6000 हजार टुकड़ों में विभाजित हो जाता है । हमारे जितने टुकड़े होते है उतनी ही प्रभावशाली ढ़ंग से प्रतिकार करने की हमारी जो क्षमता है, वह कमजोर होती जाती है।चूंकि दुश्मन ( ब्राह्मण ) शेष मूलनिवासियों को गुलाम बनाए रखना चाहता है, और दबाना चाहता है । हाहाहा घरवापसी भूल गए क्या ??? **दुनिया में प्रत्येक क्रिया की प्रतिक्रिया होती है।** यह एक वैज्ञानिक नियम है मगर शासक जाति के लोगों ने योजना बनायी कि हम क्रिया तो करेंगे किन्तू लोगों को प्रतिक्रिया करने लायक नहीं छोड़ेंगे। इसलिए उन्होंने हमें हजारों जाति के टुकड़ों में विभाजित कर, जाति की उपजातियां बनाकर हमें प्रतिकार विहीन बना दिया । जब उपजाति बनाकर प्रतिकार विहीन बनाया जाता है तब कोई भी समूह अपने उपर थोपी जा रही गुलामी का प्रतिकार करनेलायक बचा ही नहीं रहता । तब थोपी गई गुलामी मानने के अलावा उसके पास दूसरा कोई भी विकल्प शेष नहीं रहता। मगर मुसलमानो के बढ़ते दबाव **( दलितों का मुस्लिम धर्म स्वीकार करना )*** के कारण ब्राह्मणो का **तिलमिलाना** एक शाश्वत प्रकिरिया थी ॥………………………….. कानून बनाओ कानून बनाओ !!!!! कौन चिल्ला रहा है ???

जिससे पहले निपटना भी इनके लिए आवशयक था । और इसमें ब्यावधान इस्लाम के मानने वाले वे मुसलमान थे जो 712ई के बाद ब्राह्मणो के अत्याचार से छुटकारा पाने के लिए इसे स्वेकार किए थे यानि मूलनिवासी दलित । वास्तविकता यह है की जब मुसलमान भारत में नहीं थे तब भारत में ‘जाति की समस्या’ सबसे बड़ी समस्या थी। अर्थात ब्राह्मण और अब्राह्मण इनके बीच भारत में संघर्ष बहुत भयानक रूप मे शुरू था। यानि युद्ध शुरू था। ब्राह्मण यानि यूरेशियन अलग थे। वे खुद को अन्य लोगों की तुलना में श्रेष्ठ समझते थे मूलनिवासियों के गले मेन हांडी और झाड़ू बांधना और कुनवे से पानी न भरने देना और भी शारीरिक शोषण जैसा की उपरोक्त बताया हमने दूसरों के साथ असमानता का व्यवहार करते थे,। इसलिए ब्राह्मण और अब्राह्मण (अर्थात जो ब्राह्मण नहीं है) इनके बीच आपस में लड़ाई शुरू थी।
मुसलमनों के भारत में आने से पूर्व यदि यह भारत की सबसे बड़ी समस्या वर्ण-जाति-अस्पृश्यता थी तो मुसलमान भारत में आने के बाद क्या यह समस्या किसी कपूर की तरह उड़ गई ? यदि वो उड़ी नहीं होगी तो फिर गई कहाँ ? यदि भारत में ही है तो ब्राह्मण जैसा बताते हैं कि भारत की वर्तमान सबसे बड़ी समस्या हिन्दू-मुसलसमान की समस्या तो अब है तो फिर वर्ण-जाति-अस्पृश्यता कितनी बड़ी समस्या होगी ?कल्पना करने से ही सिहरन सी दौर जाती है ।

खास बात यह कि वर्ण-जाति-अस्पृश्यता की समस्या मूलत: किसने निर्माण की? यह समस्या ब्राह्मणों ने निर्माण की है और यदि यह समस्या आज भी कायम हैं तो ब्राह्मण ऐसा प्रचार क्यों करते हैं कि भारत की वर्तमान सबसे बड़ी समस्या हिन्दू-मुसलमान’ की समस्या है ???** वास्तव में यही इनकी बगुला नीति है जो शिकार को भ्रमित कर तात्कालिक निशाना कहीं और लगाता है **!!!! जैसे की धुर्विकारण की नीति का निशाना ॥ जिस आतंकवाद का, दहशतवाद का प्रचार आज किया जाता है वह दहशतवाद या आतंकवाद न होकर वह धार्मिक धृवीकरण के कार्यक्रम का एक हिस्सा ही तो है । लव जिहाद ,मुस्लिम आतंकवाद एवं मुस्लिम विरोध का जितना ज्यादा प्रचार होगा उतना ज्यादा उस प्रचार का धार्मिक धृवीकरण हो तो होगा ॥ इसके बाद यह साबित हुआ की मुस्लिम इन ब्राह्मणो के म्ंतब्य मे अवरोध हैं तो इंका सेग्रिगेसन कैसे किया जाए जो धर्म के आधार पर हो ??

तब पता चला की मुसलमानों को धर्म के आधार पर सेग्रीगेट करने के पीछे का कारण राजनीति है। मुसलमानों को धर्म के आधार पर सेग्रीगेट करने के लिए मुसलमानों को धर्म के संदर्भ में टार्गेट (निशाना) बनाया गया। मुसलमानों के सेग्रीगेट करने के लिए बाबरी मस्जिद का मुद्दा उठाया गया। बाबरी मसिजद का मुद्दा उठाने से मुसलमान एक तरफ हो गया। मुसलमान कभी भी राम मंदिर बनाने के लिए खड़े नहीं हो सकते हैं, तो स्वाभाविक है कि जब मुसलमान बाबरी मस्जिद के तरफ खड़ा होगा, तो दूसरी तरफ ब्राह्मणो द्वारा एससी, एसटी और ओबीसी से ये कहा गया कि हम राम मन्दिर बनाना चाहते हैं और मुसलमान राम मन्दिर नहीं बनने देना चाहते हैं। इस मुद्दा के आधार पर ब्राह्राणों द्वारा भारत में बहुत बड़ा आन्दोलन चलाया गया और मुसलमानों को इसके परिणाम-स्वरूप मुसलमानों को धर्म के आधार पर टार्गेट बनाकर उनको सेग्रीगेट किया गया ।

इससे मुसलमान अलग हो गया और एससी, एसटी और ओबीसी अलग हो गये !! अरे अलग ही नहीं हुवे बल्कि आरक्षण को भी दरकिनारे कर दिये आज ये संविधान मे परिवर्तन कर आसानी से इसे समाप्त कर देंगे ?? इस तरह से बाबरी मसिजद को मुद्दा बनाकर मुसलमानों को धर्म के आधार पर सेग्रीगेट किया गया। अगर एससी, एसटी और ओबीसी को हिन्दू बनाना है तो मुसलमानों को धर्म के आधार पर टार्गेट करना होगा । तब जाकर एससी, एसटी और ओबीसी के ऊपर प्रतिक्रिया निर्माण किया जा सकता है और इनके ऊपर प्रतिक्रिया निर्माण करके एससी., एसटी. और ओबीसी को हिन्दू बना सकते हैं इस को बहुत शुछ्म और गहन – मनन से समझना होगा । अगर एससी का आदमी एससी के नाम पर संगठन बनाता है, तो ब्राह्राण उस संगठन का सदस्य भी नहीं बन सकता है। आदिवासी अगर आदिवासी के नाम पर संगठन बनाता है तो ब्राह्राण उसका सदस्य भी नहीं बन सकता है तो नेता कैसे बनेगा ??? ओबीसी अगर ओबीसी के नाम पर संगठन बनाये तो ब्राह्राण उसका सदस्य भी नहीं बन सकता, तो उसका नेता कैसे बनेगा? मगर एससी, एसटी, ओबीसी को अगर हिन्दू बनाया जाय तो धर्म के आधार पर एससी, एसटी और ओबीसी का ध्रुवीकरण होगा । *****अगर धर्म के आधार पर एससी, एसटी, ओबीसी का धु्रवीकरण होगा तो उसका नेता यकीनन ब्राह्राण ही होगा ******। इसका मतलब है कि मुसलमानों को धर्म के आधार पर टार्गेट करने के पीछे का मकसद एससी, एसटी और ओबीसी को हिन्दू बनाना है और एससी, एसटी, ओबीसी को हिन्दू बनाकर ब्राह्राणों का वोट बैंक बनाना है। ब्राह्राणों के लिए वोट बैंक बनाकर ब्राह्राणों के समर्थन में खड़ा करवाकर, उनको चुनावी राजनीति में सफलता हासिल करने के लिए एक हथकंडा अपनाया गया । इस तरह से मुसलमानों को सेग्रीगेट करने के लिए धर्म को आधार बनाकर अल्पसंख्यक ब्राह्राणों को बहुसंख्य बनाने का कार्य किया गया। .
अब भी न समझ सके तो घर के बगल वाली नाली मे जा के डूब जाना मुझे न कहना की बताया नाही !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!