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भारत को एक लंबे संघर्ष और असीमित बलिदान के बाद 15 अगस्त-1947 को आज़ादी मिली. अभी आजादी का जशन पूरी तरह मनाया भी नही गया था के हमारा राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की हत्या 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे ने गोली मार कर कर दि.इस तरह स्वतंत्र भारत का ए पहला आतंकवादी घटना था और नाथूराम गोडसे स्वतंत्र भारत का प्रथम आतंकवादी था.बहुत आश्चर्य होता है जब आज नाथु राम गोडसे को कुछ संप्रदायिक पार्टीयो द्वारा गोडसे को एक राष्‍ट्रीए हीरो बनाने की कोशिश चल रही है. इस आतंकवादी को पैदा करने वाला संगठन आर .एस . एस था. इस संगठन की बुनियाद 1925 मे विजयदशमी के दिन केशव हेडगोवार ने रखी जिस का मक़सद हिन्दुत्व के कॉन्सेप्ट को आयेज बडाना था. इस संगठन ने आजादी की लड़ाई मे कभी भी हिस्सा नही लिया बल्के बहुत से दस्तावेज़ से साबित होता है के संघ अंग्रेज़ो की चतुराई मे लगा रता था. संघ ने हमेशा भगवा झंडे को तरजीह दी कभी भी ए लोग राष्टिये झंडे को सल्यूट नही किया.

सत्य- अहिंसा के सबसे बड़े प्रवर्तक महात्मा गाँधी की हत्या 30 जनवरी 1948 को कर दी गई थी, लेकिन उनकी हत्या की साजिश रचने वालों ने इससे कुछ दिन पहले भी 20 जनवरी को एक प्रार्थना सभा में बापू को मारने का प्रयास किया था हालाँकि वे इसमें असफल रहे।बहरहाल, अगर 20 जनवरी के हादसे को गंभीरता से लिया गया होता तो शयेद बापू बच गये होते.गाँधी जी के हत्या का कारण पाकिस्तान को 55 करोड़ रुपये देने के लिये सरकार को बाध्य करना और उन का मुस्लिमो के प्रति प्रेम बताया जाता है.लेकिन गन्ही जी के पौत्र तुषार गाँधी बापू की हत्या का यी करण नही मानते, उन्हो ने अपनी पुस्तक ‘ लेट्स किल गाँधी” मे लिखा है के गाँधी जी की हत्या पूर्वनियोजित थी और ब्राह्मण का एक समुदाय जो हिन्दू राष्ट्र बनाना चाहता था, उसी ने हत्या करवाया क्यो के वे गाँधी जी को अपने राह मे रोड़ा समझती थी.

Why Godse killed Gandhi पुस्तक मे व. टी. राजशेखर लिखते है के गाँधी जी की हत्या के बारे मे संघ को पहले से ही मालूम था, जैसे ही हत्या की खबर मिली मिन्टो मे ही पूरे भारत मे मिठाये संघ के द्वारा बांटी गयी. जिस से लोग नाराज़ हो कर महाराष्ट्र और कर्नाटक मे लोगो ने बहुत से ब्राह्मणो के घर मे आग लगा दी.गाँधी जी हत्या का समय गोवालकर मद्रास मे ब्राह्मणो के एक सभा मे उपस्थित थे, उस के बाद वे नागपुर वापस आ गये, मगर 1 फरवरी 1948 को रात्रि मे उन्हे गाँधी जी की हत्या मे शामिल होने पे गिरफ्तार कर लिया गया. 4 फरवरी को संघ पर पूरे देश मे प्रतिबंध लगा दिया गया. गृह मंत्री सरदार पटेल 18 जुलाइ-1948 के एक पत्र मे श्यामा प्रसाद मुखर्जी को लिखा के हमारे रिपोर्ट के अनुसार संघ और हिन्दू महासभा खासतौर से संघ ने देश मे घ्रणा का ऐसा माहौल बनाया जिस के करण गाँधी जी की हत्या हो गयी. 11 सितंबेर 1948 को एक और पत्र मे पटेल ने लिखा के जिस तरह गाँधी जी के हत्या के बाद संघ वालो ने खुशी जाहिर की और मिठायी बांटी जिस के करण लोगो मे नाराजगी बड गयी, इसी कारण संघ पर प्रतिबंध लगाना पड़ा.

अब हम आप को गाँधी जी की हत्या के पीछे का एक और सच बताने जा रहा हु जो के संघ की साम्प्रदायिकता जेहनीयात मे पैदा हुआ था, क्यो के गाँधी जी की हत्या पूर्वनियोजित थी इस लिये नाथूराम गोडसे का बंगलोर के एक हॉस्पिटल मे खतना -(Circumcision कराया गया ताके मारने वाला मुसलमान प्रतीत हो सके, जिस के कारण जब ए खबर फैले गी तो मुसलमानो का क़त्लेआम शुरु हो जाये गा , मगर किस्मत का खेल देखिये के जैसे ही गाँधी जी को नाथूराम गोडसे ने गोली मारी वहा पे एक मौजूद आदमी ने कहा के ए नाथु तुम ने ए क्या कर दिया?. हत्या के कुछ देर बाद प्रधानमंत्री जवाहर लल नेहरू ऑल इंडिया रेडियो पे आये और उन्हो ने एलान किया के ‘ बहुत अफसोस के साथ कहना पड रहा है के आज एक पागल हिन्दू ने गाँधी जी की हत्या कर दी.

अब आप स्वंय देखे के आजादी के पहले और बाद मे संघ ने सिर्फ देश के खिलाफ ही काम किया है, और उन के बहुत से सदस्यो ने भी राष्ट्र के लिये काम नही किया है. इसे दुर्भाग्यपूर्ण ही काहे गे के संघ के सदस्य अटल बिहारी बाजपायी जो के अंग्रेज़ो से लिखित माफी भी मांग चुके है और वो पत्र आउटलुक मे भी प्रकाशित हो चुका है भारत के प्रधानमंत्री बी बन चुके है. इस लिये हम कह सकते है के नाथु रम गोडसे स्वतंत्र भारत का पहला आतंकवादी था और संघ आतंकवाद पैदा करने वाला प्रथम संगठन था.