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”धरती की सुलगती छाती के बेचैन शरारे पूछते हैं
जो लोग तुम्हें दिखला न सके, वो खून के धारे पूछते हैं
अम्बर की जुबां सुबकती है, सागर के किनारे पूछते हैं
ऐ रहबरे मुल्क, ओ कौम बता ये किसका लहू, किसका लहू।”

पाक का अवाम तहरीके तालिबान के वहशियाना बाल संहार से गमजदा है। पाक टीवी चैनल की एंकर सनम बलोच बिलख-बिलख कर कह रही हैं- अब कोई उम्मीद नहीं, अब तो लगता है कुछ नहीं बदलेगा।” एक के बाद एक जनाजे उठने के बाद भी अगर पाकिस्तान के हुक्मरानों को होश नहीं आया तो यह मान कर चलना चाहिए कि इस देश का वजूद खतरे में है। पाक का अवाम यह भी जानता है कि भारत ने हमेशा उनके गायकों, अभिनेताओं का अपने यहां स्वागत किया है। हमने यहां उनके कितने ही बच्चों के दिल के आपरेशन कर उनको जीवनदान दिया है। पेशावर बाल संहार के बाद भी भारत गम की घड़ी में उसके साथ खड़ा हुआ है। जितना दर्द सीमा के पार था उतना ही दर्द यहां भी है लेकिन अफसोस कि पाकिस्तान की न्यायपालिका और प्रशासन भारत के दर्द का अहसास ही नहीं कर रहे। मुम्बई हमले का मास्टर माइंड हाफिज सईद पेशावर कांड के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराते हुए बदला लेने की धमकियां दे रहा है तो दूसरी तरफ एक षड्ïयंत्र के तहत मुम्बई हमले के साजिशकर्ता जकी-उर-लखवी को जमानत दे दी गई। एक तरफ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ आतंकवाद के खिलाफ लडऩे की कसम खाते हैं, दूसरी तरफ लखवी को जमानत की टाइमिंग अपने आप में काफी कुछ कह देती है। भारत के कड़े प्रोटैस्ट के बाद और बढ़ते दबाव के बीच नवाज शरीफ ने लखवी की जमानत को हाईकोर्ट में चुनौती देने की बात की है। लखवी को शांतिभंग की आशंका में गिरफ्तार कर लिया गया है। वह जेल में रहेगा। इस तरह के घटनाक्रम से पाक ने बच्चों के बलिदान को मजाक बना डाला लेकिन भारत को उन पर कोई भरोसा है ही नहीं। हाफिज सईद का करीबी लखवी लश्कर का दूसरा मुखिया है। लखवी ही वह शख्स है जिस पर मुम्बई हमले की पूरी जिम्मेदारी थी और जो हमलावरों को निर्देश दे रहा था जबकि हाफिज सईद सिर्फ एक दिमाग की तरह काम कर रहा था।

मुम्बई हमले में कसाब की गिरफ्तारी के बाद उसने लखवी के बारे में कई खुलासे किए थे। डेविड हेडली, अबु जिंदाल ने भी पूछताछ में लखवी का नाम लिया था। जब मुम्बई हमले में भारत के दबाव में लखवी को गिरफ्तार किया गया था तो उससे पहले उसने लश्कर के अपने साथियों से कहा था कि मुम्बई हमला तो शुरूआत है। उसने ‘भारत का खून बहाओ’ षड्यंत्र के तहत भारत में ऐसे कई हमलों की योजना बना रखी थी। लखवी ने भारत के खिलाफ फिदायीन तैयार कर रखे थे। भारत की मोस्ट वांटेड और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की सूची में अन्तर्राष्ट्रीय आतंकी करार दिए गए लखवी को जमानत दिलाने के लिए वहां की सरकार और फेडरल जांच एजैंसी सीधे-सीधे जिम्मेदार हैं।

पाक का अवाम इस समय काफी आक्रोश में है, अवाम शांति चाहता है। वह इस बात को समझता है कि अफगानिस्तान और भारत को चुनौती देने के लिए जेहादियों को गले लगाने की नीति उन्हें महंगी पड़ रही है। पाक मीडिया, जो हमेशा भारत को कोसता रहा है, अब यह स्वीकार करने लगा है कि पाक वही फसल काट रहा है जो उसने दशकों से बोई थी। पाक मीडिया ने खुलकर हाफिज सईद, उसके संगठन और अन्य संगठनों पर कार्रवाई की मांग की है, जो जेहादी जहर फैला रहे हैं।

पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ, पाक की सेना और खुफिया एजैंसी आईएसआई के पास मौका है कि वह आतंकवाद पर दोहरा नाटक छोड़ें और आतंकवाद के खिलाफ डट कर लड़ाई लड़ें और अवाम के आक्रोश को शांत करने का प्रयास करें। अगर वे अब भी कड़ा स्टैंड नहीं लेते तो अवाम का आक्रोश एक न एक दिन उन्हें ही निगल लेगा।

जिस इस्लाम में एक अल्लाह, एक कुरान, एक रसूल और एक लाख 24 हजार पैगम्बरों की सर्वमान्य स्वीकार्यता हो, उसी इस्लाम में कितने जातीय संघर्ष, कितनी विचारधाराएं पाक में देखी जा रही हैं। आखिर क्या कारण है कि दुनिया को मानवता का संदेश देने वाला पाक ऐसे लोगों की गैर इस्लामी हरकतों से आज ऐसी स्थिति में पहुंच गया कि पाक दुनिया का आठवां खतरनाक देश हो गया है। पाक गैर इस्लामी हरकतें नहीं करता तो बंगलादेश अलग क्यों होता? अफगानिस्तान में तालिबान की हकूमत बनने पर उसे मान्यता देने वाला पहला देश पाकिस्तान ही था। अगर पाक अभी नहीं सम्भला तो फिर हैवान खेलते रहेंगे हैवानियत का खेल, दम तोड़ती रहेगी इंसानियत और तड़प-तड़प कर दम तोड़ती रहेगी मासूमियत और एक न एक दिन पाक खुद-ब-खुद टुकड़े-टुकड़े हो जाएगा।