stop-killing

आतिफ जावेद आतिफ की एक नज्म आप के लिए —

बाबा मुझे डर लगता है
बाबा मेरी मिस कहती हैं,
कल से सभी बच्चों को अपने घर रहना है,
घर पढ़ना है,
मैंने सुना है ….
एक से काली मूंछों वाले अंकल,
बम लगाकर आएंगे
सब बच्चे मर जाएंगे ….
भूल गई में,,, नाम भला था ….
ाममममम …… शायद आतंकवादी कहा था …
बाबा क्यों मारेंगे हम?
हमसे कोई भूल हुई है?
हमसे क्यों नाराज हैं अंकल?
बाबा !!!!
उन्हें गुड़िया दे दूँ?
या फिर मेरी रंगों वाली ….. याद है ना वह नीली डिबिया?
मेरी पिछली जन्मदिन पर मुझे आप लाकर दी थी
और मेरी वह प्यारी टट्टू …. रेड कलर की तितली वाली
वह भी दे दूँ?
फिर तो न मारेंगे मुझे?
बाबा !!!! मुझे डर लगता है ..

याद है बाबा एक बार जब
मुझे हाथ पे चोट लगी थी
बहुत दर्द हुआ था
थोड़ा सा खून भी निकला था
बहुत ज्यादा रोई थी में

क्या ये बम बहुत बड़ा होता है
ज्यादा चोट लगे गी
दर्द भी शायद ज्यादा हो गा
बाबा मुझे डर लगता है !!!!