arvind-kejriwal

ओ अरविंद, व्हाट्स योर प्रॉब्लम ड्यूड? अरे लोग आनंद से सो रहे हैं तो सोने दो ना.. तुम्हे बड़ा शौक चढ़ा है उनकी नींद खराब करने का? करोगे तुम भ्रष्टाचार दूर? लाओगे तुम स्वराज? करोगे तुम व्यवस्था-परिवर्तन? बदलोगे तुम देश को? माननीय बाबाजी का पावन ठुल्लू?

अबे.. वो मैग्सेसे अवार्ड क्या मिल गया? तो क्या तुम्हे हमारी छाती पर मूंग दलने का अधिकार मिल गया? ऐसे अवार्ड हमारे श्रद्धेय नेताओं और हमारी जूती पर! तुमने अन्ना को और उनके मंच को यूज़ किया है….छाती में खंजर भोंकू कही के…सीखो कुछ जनरल साहब से जो केन्द्र में मंत्री बन गए .. सीखो कुछ किरण मैडम जी से जो यू टर्न मारके अब दिल्ली की सी एम बनेंगी… बड़े आये तुम नेता बनने… भैगोड़े कहीं के …भाग गये दिल्ली की कुर्सी छोड़ के…. अबे पगले …

ख़ाक नेता हो? कुर्सी होती है चिपकने के लिए … जोंक की तरह… और तुम भाग गये जनता को त्राहि माम करते हुए? नेताओं के कीटाणु क्यूँ नहीं हैं तुम में? गिरते क्यूँ नहीं हो थोडा? तुम्हारा आत्म-सम्मान गया तेल लेने… बेच देना था खुद की आत्मा को… बच्चों की कसम खाते हो?

खाना था तो पुल खाते, सड़के खाते, कोयला खाते, थोडा सा देश को टेस्ट करते और फिर देखते कैसे सम्मान मिलता तुम्हे इन्ही लोगो द्वारा… आये बड़े दूध के धुले काजल की कोठरी में? बिन्नी तुम्हें छोड़ गया, गोपीनाथ भगा, शाजिया तुम्हे छोड़ गयी .. सुधरो मिंयाँ…तानाशाही नहीं चलेगी नहीं तो कार्यकर्ता तान देंगे…

लोग चुनावों के बाद विदेश रंगरलियाँ मनाने जाते हैं और तुम कमबख्त जेल चले गये… ड्रामेबाज़ कहीं के… अब महात्मा गांधी ने 1917 में नैतिक मूल्यों पर बेल लेने से मना कर दिया तो तुम भी ऐसा करोगे? 1930 में अगर गांधी जी टाइम मैगज़ीन के कवर पर आने वाले पहले भारतीय थे और तुम अब 2014 में दुसरे बन गये हो तो क्या गांधी बन जाओगे? अबे गांधी तो आजकल कोई बाबा को घोषित किया गया है जो कहता है कि मैं जब मूत्र-विसर्जन के लिए भी निकलता हूँ तो दो हज़ार लोग इकट्ठे हो जाते हैं? और बाबा चाहते तो प्रधानमंत्री बन सकते थे लेकिन बाबा का ऐसा अनूठा त्याग? बाबा रे बाबा …!!

लोगों को यहाँ बेल और पर्सनल बांड का अंतर नहीं पता बाबू… हम कोई वकील थोड़े ही हैं? अब माफ़ी मांगते हो दिल्ली की जनता से? यहाँ नेता जी बलात्कार उकसाऊ बयान देकर भी शर्मिंदा नहीं होते? कुर्सी भी कोई छोड़ता है भला? तुम्हारी तो औकात ही क्या है जी? क्या तुम सारा दिन चोर चोर खेलते हो? बाहर आओ बचपन के चोर सिपाही खेल से… नेता चोर, पुलिस चोर, मीडिया चोर, व्यापारी चोर .. ऐसे चौड़े में कौन कहता है बे? जनता कितना हर्ट हो जाती है पता है तुम्हे?

तुमने बोला मीडिया कॉर्पोरेट के चंगुल में है अब देखा न अम्बानी ने चार हज़ार करोड़ में खरीद लिया कित्ते चेनलों को… गैस घोटाले पर बोला और पता नहीं ये कोर्ट ने क्यूँ मान लिया कि तुम सही कह रहे थे? ज्योतिषी बन जाओ मैं कहता हूँ!

बेटी तुम्हारी 96% मार्क्स ला रही है? ये भी कोई नेताओं के बच्चों के लक्षण हैं? वे तो किसी कटारा की हत्या करते हैं, वेतो किसी जेस्सिका को गोली मारते हैं! क्यूँ आ गये यार इस फील्ड में? अरे तुमसे आधी उम्र की लड़कियां तुम्हे फेसबुक पर गाली देती हैं, तुम्हे खुजलीवाल, भगोड़ा,खांसीराम, aaptaard, साला, कमीना कहती हैं क्योंकि उनके पप्पा ने सिखाया है, तुम्हे बुद्धिजीवी लोग पल्टूराम, पाकिस्तान का एजेंट कहते हैं, तुम्हे योग और अध्यात्म के मार्ग पर चलने वाले लड़के सारा दिन फेसबुक पर स्टेटस अपडेट करके गाली देते हैं – देशद्रोही, गद्दार तक कहते हैं? क्या भीतर की यात्रा है उनकी? अबे कुछ सर्प, गिध्ह, लोमड के अंश लाओ खुद में फिर देखो ये ही युवा कैसे तुम्हारे पीछे दौड़ते हैं!

लोग तुम्हारी छोटी से छोटी हरकत पर नज़र रखते हैं जैसे एक शौपिंग माल का पिछला दरवाजा तुमने बंद करवा दिया था अपनी सहूलियत के लिए, तुमने रिश्वतखोरी बंद करवा दी थी, तुमने पानी और बिजली व्यवस्था को बहाल करने की कोशिश की थी…किस मिटटी के बने हो भाई? यहाँ लोगों को शोषण में मज़ा आता है … लुटने और लूटने में मज़ा आता है!

तुम्हारे गाल पर थप्पड़ पड़ने में लोगों को मज़ा इसलिए आता है क्योंकि हम इस भ्रष्ट तंत्र का रोज़ अपने गालों पर पड़ने वाले थप्पड़ों के अभ्यस्त हो गये हैं!

काश ! काश ! काश ! आज जितने सवाल लोग तुम्हारे बारे में पूछते हैं और अपनी ‘फ़ालतू’ ऊंगली उठाते है काश वे पिछले 15-20 साल में भी इतने ही जागरूक होते ?? तरस आता है ऐसे ‘बेहोश’ लोगों पर जो उनको ‘देशद्रोही’ भी कह देते हैं बिना किसी कारण के ..!!