संपादक मंडली

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14 thoughts on “संपादक मंडली

  1. ZIYA HASAN

    संपादक मंडली मे मेरा भी नाम रखा जाये निवेदन है ,कला साहित्य पर लेख भेजता रहूँगा ।+919835451555

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  2. harsh deo

    . मैंने पहली बार आपका पोर्टल देखा, आपने अच्छे विषयों का चुनाव किया है. संभव हुआ तो मैं भी कुछ योगदान करूँगा.

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  3. afzal khan

    हर्ष जी

    धन्यवाद आप ने खबर की खबर न्यूज़ पोर्टल पे विज़िट किया .आप के लेख का स्वागत है . आप अपना लेख हमे भेज सकते है.

    अफ़ज़ल ख़ान

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  4. Tejus

    संपादक मंडली से अनुरोध है की अपने वेबसाइट पर लेखक के नाम से आर्टिकल सर्च करने का ऑप्शन दें!

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  5. zakir hussain

    वैसे ये विकल्प है, किसी भी लेख पे लेखक के नाम पे क्लिक करने पे, उसके अन्य लेखो की लिस्ट आ जाती है.

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      1. afzal khan

        तेजस जी सर्च का ऑप्शन शुरू कर दिया गया है , साइड बार में सर्च पे लेखक नाम या लेख से खोज सकते है .

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  6. azad

    प्रिय ख़बरों की खबर !

    आप के लेख और सामग्री प्रथम बार बढ़ने में क्रांतिकारी लगती है.

    लेकिन जैसे ही हम इतिहास को उठते हैं तो आपकी सामग्रियों की पोल खुल जाती है

    आपके भड़काऊ और आधारहीन लेख हिन्दुओं में जातिभेद को बढ़ावा दे रहे हैं

    हिन्दुओं में कोई भी जाति “दलित” नहीं थी

    ये शब्द अंग्रेजों की देन है

    मेक्समूलर और मैकाले ने हमारे प्राचीन वेदों , शास्त्रों और सनातन संस्कृति को अंग्रेजी सभ्यता से नीचे दिखाने के लिए “इतिहास की पुस्तकों में मनमाने परिवर्तन” करके स्कूलों में पढ़वाया
    जिससे नयी पीढ़ी अपने देश और संस्कृति को निम्न और अंग्रेजों को उच्च मानने लगी

    कुछ काल्पनिक महापुरुष जिन्होंने देश की आज़ादी में सहयोग करने के स्थान पर
    अपने राजनैतिक लाभ के लिए हिन्दुओं में जाति-भेद पैदा करके
    अंग्रेजों के एजेंट के रूप में उसी तरह से काम किया
    जैसे कि जिन्ना ने हिन्दू-मुस्लिम फूट डाली थी

    अगर भारत में प्राचीन काल में जन्म के अनुसार जातिभेद होता तो
    वाल्मीकि , वेदव्यास, सूतजी जैसी शूद्र-संताने
    हमारे पुराण ,रामायण और वेदभाष्य नहीं लिख पाते.

    खैर आपके हिन्दू-विभेदकारक लेखों का कारण
    आपके संपादक मंडल को देख कर पता चल रहा है

    अफ़ज़ल खान(दुबई)

    अनवर शमीम (बिहार)

    सिकंदर हयात (दिल्ली)

    बढ़िया संपादक मंडल है
    हिन्दुओं के बारे में लेख लिखने के लिए

    सलाह — आप सभी संपादकों से अनुरोध है कि
    अपनी 4 -5 पीढ़ी के पहले के बुजुर्गों के नाम अवश्य खोज कर देखें
    शायद आपको मालूम हो जायेगा कि —

    आपका “मूल” क्या है

    और

    आप “क्या” हो गए ?

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  7. azad

    मेरा कमेंट छापने ही हिम्मत है ?

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    1. सिकंदर हयात

      ये शायद आपका इस साइट पर पहला कमेंट हे आपका बहुत बहुत स्वागत हे . बता दू की इस साइट के संपादक फिलहाल सिर्फ अफ़ज़ल भाई ही हे. बाकी ध्यान से पढ़िए जिन लेखो की आप बात कर रहे हे वो सिर्फ हन्नान अंसारी जी ही लिखते हे मुझे ऐसा लगता हे की शायद हन्नान साहब बसपा जैसी किसी पार्टी या संगठन से जुड़े हे वो क्या कह रहे हे आप क्या कह रहे हो आप जानो और आपस में बहस करो . जहां तक हम सब का सवाल हे हम प्योर सेकुलर लोग हे हमें किसी भी धर्म के प्रसार या विरोध या विस्तार या महिमांडन या अपमान करने में कोई भी दिलचस्पी नहीं हे ना कभी होगी हमारे मुद्दे और हे

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  8. azad

    जानकर बहुत अच्छा लगा

    सिकंदर जी !

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  9. सिकंदर हयात

    ये जानकर आपको और अच्छा लगेगा की शायद जो आपको अच्छा लगा की ” हम प्योर सेकुलर लोग हे हमें किसी भी धर्म के प्रसार या विरोध या विस्तार या महिमांडन या अपमान करने में कोई भी दिलचस्पी नहीं हे ”
    आगे यही विचार यही मिजाज अधिक से अधिक लोगो में फैलाना उन्हें भी अपने जैसा कर लेना का हमारा पूरा इरादा हे अपनी तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ेंगे और इसी से ही उपमहादीप की सारी प्रॉब्लम खत्म होने की नीव पडेगी

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  10. afzal khan

    आज़ाद साहब आप अपने विचार , लेख खबर की खबर में भेजे प्रकाशित किया जायेगा !

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  11. zakir hussain

    आज़ाद साहब, आप हम लोगो की तरह, दूसरी जातियों पे असमानता या शोषण का दोष मढ्ते हो. दलित शब्द, हिंदू धर्म-ग्रंथो मे ना हो, कोई अन्य हो, या कोई परंपरा, किताबो से भिन्न हो, लेकिन इस भेदभाव या ग़लत परंपराओं को ढोया आपके ही समाज के सवर्ण तबके ने है.
    अगर ऐसा ना होता तो अंबेडकर, ज्योतिराव फूले, दयानंद सरस्वती जैसे लोगो ने इसके लिए कठिन लड़ाई ना लडी होती. आप अपने समाज का मूल्यांकन खुद कीजिए, ग़लतियों को सुधारिये. वैसे भी कोई भी व्यवस्था या विचार आदर्शतम नही होता, सुधार की गुंजाइश हमेशा रहती है. सभी लोग अपने घर की सफाई करे, तो पूरा समाज स्वच्छ बनेगा.

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